लोन और क्रेडिट

क्रेडिट स्कोर 600 से 750 कैसे करें: 12 महीने का स्टेप-बाय-स्टेप प्लान

कम क्रेडिट स्कोर को 600 से 750+ तक ले जाने का महीने-दर-महीने प्लान: क्रेडिट यूटिलाइज़ेशन, रिपोर्ट की गलतियाँ सुधारना, सिक्योर्ड कार्ड और आम गलतियाँ।

आपने लोन के लिए आवेदन किया और बैंक ने कहा, “सॉरी, आपका CIBIL स्कोर कम है।” या लोन मिला भी, तो ब्याज दर इतनी ज़्यादा थी कि EMI देखकर होश उड़ गए। अगर आपका क्रेडिट स्कोर 600 के आसपास है, तो आप अकेले नहीं हैं। लाखों भारतीय इसी स्थिति में हैं, और अच्छी ख़बर यह है कि सही कदम उठाकर 6 से 12 महीने में स्कोर को 750 के पार ले जाना पूरी तरह संभव है।

इंटरनेट पर “क्रेडिट स्कोर कैसे बढ़ाएं” पर बहुत कुछ लिखा है, लेकिन ज़्यादातर लेख सिर्फ़ “समय पर EMI भरें” जैसी सामान्य बातें दोहराते हैं। इस लेख में हम एक ठोस, महीने-दर-महीने की योजना देंगे, जो खास तौर पर उन लोगों के लिए है जिनका स्कोर 550 से 650 के बीच अटका हुआ है। हम यह भी समझेंगे कि स्कोर गिरा क्यों, कौन सी गलतियाँ इसे और नीचे ले जाती हैं, और किन “शॉर्टकट” से बचना चाहिए।

क्रेडिट स्कोर क्या है और 600 का मतलब क्या है?

क्रेडिट स्कोर 300 से 900 के बीच की एक संख्या है, जो बताती है कि आप उधार लिया पैसा कितनी ज़िम्मेदारी से लौटाते हैं। भारत में चार क्रेडिट ब्यूरो यह स्कोर तैयार करते हैं: TransUnion CIBIL, Experian, Equifax और CRIF High Mark। बैंक और NBFC हर महीने आपके लोन और क्रेडिट कार्ड की जानकारी इन ब्यूरो को भेजते हैं, और उसी के आधार पर स्कोर बनता है।

आम तौर पर स्कोर की श्रेणियाँ इस तरह समझी जाती हैं:

स्कोर स्थिति लोन पर असर
750 और ऊपर बहुत अच्छा आसानी से लोन, कम ब्याज दर, मोलभाव की ताकत
700–749 अच्छा लोन मिल जाता है, ब्याज दर थोड़ी ज़्यादा
650–699 ठीक-ठाक कुछ बैंक मना कर सकते हैं, NBFC ज़्यादा ब्याज लेंगे
550–649 कमज़ोर ज़्यादातर बैंक मना करेंगे, महंगे विकल्प ही बचते हैं
550 से कम ख़राब लोन मिलना बहुत मुश्किल

600 का स्कोर बताता है कि आपके रिकॉर्ड में कोई न कोई गंभीर नकारात्मक बात है: चूकी हुई EMI, सेटल किया गया लोन, बहुत ज़्यादा क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल, या कम समय में कई लोन आवेदन। पहला काम यह पता लगाना है कि आपके केस में असली कारण क्या है।

क्रेडिट स्कोर किन बातों से बनता है?

हर ब्यूरो का फ़ॉर्मूला अलग और गोपनीय होता है, लेकिन मोटे तौर पर ये पाँच बातें सबसे ज़्यादा मायने रखती हैं:

  1. भुगतान इतिहास (Payment History): सबसे बड़ा हिस्सा। एक भी EMI या क्रेडिट कार्ड बिल 30 दिन से ज़्यादा लेट हुआ, तो स्कोर पर गहरा असर पड़ता है।
  2. क्रेडिट उपयोग अनुपात (Credit Utilization): आपकी कुल क्रेडिट कार्ड लिमिट में से आप कितना इस्तेमाल करते हैं। अगर लिमिट ₹1 लाख है और हर महीने ₹80,000 खर्च करते हैं, तो उपयोग 80% है, जो बहुत ज़्यादा माना जाता है।
  3. क्रेडिट इतिहास की लंबाई: आपका सबसे पुराना क्रेडिट खाता कितना पुराना है।
  4. क्रेडिट मिक्स: सुरक्षित लोन (होम, कार, गोल्ड) और असुरक्षित लोन (पर्सनल, क्रेडिट कार्ड) का संतुलन।
  5. नई पूछताछ (Hard Enquiries): जब भी आप लोन या कार्ड के लिए आवेदन करते हैं, बैंक आपकी रिपोर्ट निकालता है। कम समय में बहुत ज़्यादा पूछताछ से लगता है कि आप पैसों के लिए परेशान हैं।

स्टेप 1: अपनी पूरी क्रेडिट रिपोर्ट निकालें (स्कोर नहीं, रिपोर्ट)

ज़्यादातर लोग केवल स्कोर देखते हैं, रिपोर्ट नहीं पढ़ते। यह सबसे बड़ी गलती है। स्कोर बीमारी का तापमान है; रिपोर्ट असली जांच है।

RBI के नियमों के अनुसार हर क्रेडिट ब्यूरो को साल में एक बार आपको मुफ्त पूरी क्रेडिट रिपोर्ट देनी होती है। चारों ब्यूरो की वेबसाइट पर जाकर PAN और मोबाइल नंबर से अपनी रिपोर्ट डाउनलोड करें। चारों अलग-अलग निकालें, क्योंकि कभी-कभी किसी एक ब्यूरो में गलती होती है जो बाकी में नहीं होती।

रिपोर्ट में ये चीज़ें ध्यान से देखें:

  • DPD (Days Past Due) कॉलम: हर महीने के आगे “000” होना चाहिए। अगर “030”, “060”, “090” या “STD” के अलावा “SUB”, “DBT”, “LSS” दिखे, तो वहाँ समस्या है।
  • खाते की स्थिति: “Settled”, “Written Off”, या “Post Written Off Settled” जैसे शब्द बहुत नकारात्मक होते हैं।
  • अनजान खाते: कोई ऐसा लोन या कार्ड जो आपने लिया ही नहीं। यह धोखाधड़ी हो सकती है।
  • बंद लोन जो खुले दिख रहे हों: आपने लोन चुका दिया, पर रिपोर्ट में अब भी बकाया दिख रहा है।
  • गलत व्यक्तिगत जानकारी: नाम, जन्मतिथि या पते में गलती।

स्टेप 2: रिपोर्ट की गलतियाँ ठीक करवाएं (Dispute)

अनुभव बताता है कि कम स्कोर वाले लोगों में से अच्छी-खासी संख्या की रिपोर्ट में कोई न कोई गलती होती है। इसे ठीक करवाना स्कोर बढ़ाने का सबसे तेज़ तरीका है।

  1. ब्यूरो की वेबसाइट पर “Dispute Resolution” या “Raise a Dispute” विकल्प पर जाएं।
  2. जिस खाते में गलती है, उसे चुनें और सही जानकारी बताएं।
  3. सबूत अपलोड करें: लोन बंद होने का NOC, बैंक स्टेटमेंट, भुगतान की रसीद।
  4. साथ ही उस बैंक को भी लिखित शिकायत भेजें, क्योंकि गलती सुधारने की ज़िम्मेदारी मूल रूप से बैंक की है।

RBI के नियमों के तहत शिकायत का समाधान तय समय सीमा (आम तौर पर 30 दिन) में होना चाहिए, और देरी होने पर ग्राहक को मुआवज़े का प्रावधान भी है। अगर बैंक या ब्यूरो जवाब न दे, तो आप RBI के एकीकृत लोकपाल (Ombudsman) के पास cms.rbi.org.in पर शिकायत कर सकते हैं।

स्टेप 3: चल रहे बकाया को तुरंत नियमित करें

अगर कोई EMI या क्रेडिट कार्ड बिल अभी बकाया है, तो सबसे पहले उसे चुकाएं। हर महीने की देरी स्कोर को और नीचे ले जाती है। अगर एक साथ पूरा नहीं चुका सकते, तो बैंक से बात करें:

  • क्रेडिट कार्ड बकाया को कम ब्याज वाली EMI में बदलने का अनुरोध करें।
  • लोन की अवधि बढ़ाकर EMI कम करवाने (Restructuring) की बात करें।
  • ज़रूरत हो तो किसी सस्ते लोन से महंगा कर्ज़ चुकाएं। उदाहरण के लिए, गोल्ड लोन या पर्सनल लोन में से कौन सस्ता पड़ेगा, यह समझ कर फैसला करें।

“सेटलमेंट” का जाल: इससे क्यों बचें

जब आप कर्ज़ नहीं चुका पाते, तो रिकवरी एजेंट अक्सर कहते हैं, “आधा पैसा दे दो, बाकी माफ़ कर देंगे।” यह सुनने में राहत जैसा लगता है, लेकिन असल में यह स्कोर के लिए सबसे बुरे फैसलों में से एक है।

सेटलमेंट के बाद आपकी रिपोर्ट में वह खाता “Settled” दिखता है। अगले कई वर्षों तक हर बैंक यह देखेगा कि आपने पूरा पैसा नहीं लौटाया। इससे स्कोर गिरता है और भविष्य में लोन मिलना बहुत मुश्किल हो जाता है।

अगर आप पहले ही सेटलमेंट कर चुके हैं, तो इसे ठीक करने का तरीका है:

  1. बैंक से संपर्क करें और पूछें कि माफ़ की गई रकम (ब्याज और पेनल्टी सहित) कितनी है।
  2. वह बाकी रकम चुका दें।
  3. बैंक से “Closed” स्टेटस अपडेट करने और नया NOC देने का लिखित अनुरोध करें।
  4. 30–60 दिन बाद अपनी रिपोर्ट दोबारा जांचें कि स्थिति “Settled” से “Closed” हुई या नहीं।

स्टेप 4: क्रेडिट उपयोग 30% से नीचे लाएं

यह वह बदलाव है जिसका असर सबसे जल्दी दिखता है, क्योंकि उपयोग अनुपात हर महीने दोबारा गिना जाता है। अगर आपके क्रेडिट कार्ड हमेशा लिमिट के करीब रहते हैं, तो इन तरीकों से उपयोग घटाएं:

  • बिल की तारीख से पहले भुगतान करें: बैंक आम तौर पर स्टेटमेंट बनने की तारीख पर बैलेंस ब्यूरो को भेजता है, भुगतान की आख़िरी तारीख पर नहीं। अगर स्टेटमेंट से पहले ही आप बड़ा हिस्सा चुका दें, तो रिपोर्ट में कम उपयोग दिखेगा।
  • महीने में दो बार भुगतान करें: बड़े खर्च के तुरंत बाद भुगतान कर दें।
  • लिमिट बढ़ाने का अनुरोध करें: अगर आपका भुगतान इतिहास पिछले 6 महीने से साफ़ है, तो बैंक लिमिट बढ़ा सकता है। खर्च वही रखें, तो उपयोग अपने आप घटेगा। ध्यान दें, कुछ बैंक लिमिट बढ़ाने के लिए हार्ड एंक्वायरी करते हैं, इसलिए पहले पूछ लें।
  • खर्च को कई कार्ड में बांटें: एक कार्ड 90% पर रहने से बेहतर है कि दो कार्ड 30-30% पर हों।

उदाहरण: अगर आपके दो कार्ड की कुल लिमिट ₹1,50,000 है, तो कोशिश करें कि किसी भी समय कुल बकाया ₹45,000 से ज़्यादा न हो। 10% के आसपास रखना और भी बेहतर है।

स्टेप 5: पुराने कार्ड बंद न करें

बहुत लोग सोचते हैं कि स्कोर सुधारने के लिए सभी क्रेडिट कार्ड बंद कर देने चाहिए। यह उल्टा असर करता है। पुराना कार्ड बंद करने से:

  • आपकी कुल लिमिट घटती है, जिससे उपयोग अनुपात बढ़ जाता है।
  • आपका सबसे पुराना क्रेडिट खाता बंद हो सकता है, जिससे इतिहास की औसत लंबाई घटती है।

अगर कार्ड पर सालाना शुल्क नहीं है, तो उसे चालू रखें और हर दो-तीन महीने में एक छोटा खर्च करके तुरंत भुगतान कर दें, ताकि बैंक उसे निष्क्रिय मानकर बंद न करे।

स्टेप 6: अगर कोई क्रेडिट नहीं है तो “सिक्योर्ड कार्ड” से शुरुआत करें

अगर आपका स्कोर इतना कम है कि कोई कार्ड नहीं मिल रहा, या आपका पुराना सब कुछ बंद हो चुका है, तो FD के बदले क्रेडिट कार्ड (Secured Credit Card) सबसे अच्छा रास्ता है। आप बैंक में एक FD बनाते हैं, और उसके 80–90% तक की लिमिट वाला कार्ड मिल जाता है। चूंकि बैंक का पैसा सुरक्षित है, इसलिए स्कोर पूछे बिना कार्ड मिल जाता है।

इस कार्ड का इस्तेमाल ऐसे करें:

  • हर महीने बिजली बिल या मोबाइल रिचार्ज जैसे छोटे, तय खर्च इस पर करें।
  • उपयोग लिमिट के 30% से नीचे रखें।
  • हर बिल पूरा और समय पर चुकाएं, कभी “Minimum Due” न भरें।
  • ऑटो-पे लगा दें ताकि भुगतान कभी छूटे नहीं।

6–12 महीने के साफ़ रिकॉर्ड के बाद आपको सामान्य कार्ड और लोन के ऑफ़र मिलने लगेंगे।

स्टेप 7: नए लोन के आवेदन रोकें

स्कोर सुधारने के दौरान कम से कम 6 महीने तक नया लोन या कार्ड के लिए आवेदन न करें। हर अस्वीकृत आवेदन एक हार्ड एंक्वायरी जोड़ता है और स्कोर थोड़ा और गिरता है। “प्री-अप्रूव्ड” ऑफ़र पर भी तभी क्लिक करें जब सच में ज़रूरत हो।

ध्यान दें कि अपना स्कोर खुद जांचना “सॉफ्ट एंक्वायरी” है, इससे स्कोर पर कोई असर नहीं पड़ता। इसलिए हर महीने अपना स्कोर मॉनिटर करते रहें।

12 महीने की कार्य योजना

नीचे एक व्यावहारिक समय-सारणी है। आपकी स्थिति के हिसाब से असली समय अलग हो सकता है।

समय क्या करें अपेक्षित असर
महीना 1 चारों ब्यूरो की रिपोर्ट निकालें, गलतियों पर डिस्प्यूट करें, सभी बकाया की सूची बनाएं समस्या की पहचान
महीना 1–2 चल रहे बकाया चुकाएं, ऑटो-पे लगाएं गिरावट रुकती है
महीना 2–3 क्रेडिट उपयोग 30% से नीचे लाएं 20–50 अंक तक सुधार संभव
महीना 3–4 डिस्प्यूट का नतीजा जांचें, ज़रूरत हो तो लोकपाल जाएं गलतियाँ हटने पर बड़ा उछाल
महीना 4–6 सेटल खाते को क्लोज़ करवाएं, सिक्योर्ड कार्ड शुरू करें नकारात्मक रिकॉर्ड कमज़ोर
महीना 6–12 हर भुगतान समय पर, उपयोग कम, कोई नया आवेदन नहीं लगातार धीमी बढ़त, 700–750+

सबसे ज़रूरी बात: स्कोर एक दिन में नहीं बढ़ता। बैंक अब लगभग हर पंद्रह दिन में जानकारी ब्यूरो को भेजते हैं, इसलिए सुधार पहले से जल्दी दिखता है, लेकिन पुराने नकारात्मक रिकॉर्ड का असर धीरे-धीरे ही कम होता है।

किन “शॉर्टकट” से बचें

“हम 7 दिन में CIBIL ठीक कर देंगे” वाली कंपनियाँ: कोई भी कंपनी सही जानकारी को आपकी रिपोर्ट से हटा नहीं सकती। वे जो कुछ करती हैं (डिस्प्यूट दर्ज करना), वह आप खुद मुफ्त में कर सकते हैं। कई ऐसी कंपनियाँ सीधी धोखाधड़ी भी करती हैं।

छोटे लोन ऐप्स से “स्कोर बनाने” के लिए लोन लेना: बहुत से अनधिकृत लोन ऐप ऊंचा ब्याज लेते हैं और कुछ तो ब्यूरो को रिपोर्ट भी नहीं करते। अगर कर्ज़ लेना ही है, तो केवल RBI द्वारा पंजीकृत बैंक या NBFC से लें।

किसी और के नाम पर लोन लेना या गारंटर बनना: अगर आप किसी के लोन के गारंटर या सह-आवेदक बनते हैं और वह व्यक्ति चूकता है, तो आपकी रिपोर्ट भी ख़राब होती है।

EMI और बिल कभी न भूलें: व्यावहारिक तरीके

स्कोर सुधारने की पूरी मेहनत एक भूली हुई EMI से बिगड़ सकती है। इसलिए भुगतान को “याद रखने” पर नहीं, बल्कि “सिस्टम” पर छोड़ें:

  • ऑटो-डेबिट (NACH/e-Mandate): हर लोन और क्रेडिट कार्ड के लिए ऑटो-डेबिट लगाएं। क्रेडिट कार्ड में “Total Amount Due” का ऑटो-डेबिट चुनें, “Minimum Due” का नहीं।
  • सैलरी वाले खाते से ही EMI: अगर EMI किसी ऐसे खाते से कटती है जिसमें पैसा रखना आप भूल जाते हैं, तो बाउंस होने का ख़तरा रहता है। बाउंस होने पर बैंक शुल्क भी लगता है और रिपोर्ट में लेट पेमेंट भी जाता है।
  • सभी EMI की तारीखें एक जगह: अगर संभव हो, तो बैंक से EMI की तारीख सैलरी आने के 2–3 दिन बाद करवा लें।
  • बफ़र बैलेंस: EMI वाले खाते में हमेशा एक EMI जितना अतिरिक्त पैसा रखें।
  • कैलेंडर रिमाइंडर: ऑटो-डेबिट के बावजूद, हर महीने की तारीख से दो दिन पहले का रिमाइंडर फ़ोन में लगाएं ताकि खाते का बैलेंस जांच सकें।

क्रेडिट स्कोर सिर्फ़ लोन के लिए नहीं

बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर उन्हें अभी लोन नहीं चाहिए, तो स्कोर की चिंता क्यों करें। लेकिन आज कई जगहों पर क्रेडिट स्कोर देखा जाता है:

  • ब्याज दर पर मोलभाव: अच्छे स्कोर वाले ग्राहक बैंक से कम ब्याज दर और प्रोसेसिंग फीस में छूट मांग सकते हैं।
  • क्रेडिट कार्ड के बेहतर ऑफ़र: प्रीमियम कार्ड, ज़्यादा लिमिट और बेहतर रिवॉर्ड अच्छे स्कोर पर ही मिलते हैं।
  • कुछ नौकरियाँ: बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र की कुछ कंपनियाँ भर्ती के समय उम्मीदवार की क्रेडिट रिपोर्ट देखती हैं।
  • आपात स्थिति में तेज़ लोन: मेडिकल इमरजेंसी में अच्छे स्कोर वाले व्यक्ति को कुछ ही घंटों में उचित दर पर लोन मिल सकता है, जबकि कम स्कोर वाले को महंगे विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ता है।

यानी क्रेडिट स्कोर एक तरह का “वित्तीय चरित्र प्रमाण पत्र” है, जिसे बनाकर रखना हमेशा फायदेमंद है।

पहली नौकरी वाले युवाओं के लिए सलाह

अगर आपने हाल ही में नौकरी शुरू की है, तो यही सही समय है अच्छा क्रेडिट इतिहास बनाने का। एक बिना सालाना शुल्क वाला क्रेडिट कार्ड लें, उस पर केवल उतना खर्च करें जितना आप वैसे भी डेबिट कार्ड से करते, और हर महीने पूरा बिल चुकाएं। पहली सैलरी के जोश में महंगे फ़ोन या गैजेट को “No Cost EMI” पर लेने से पहले सोचें, क्योंकि कई छोटे-छोटे EMI मिलकर आपके बजट और क्रेडिट प्रोफ़ाइल दोनों पर बोझ बन जाते हैं। 22–25 की उम्र में बना 3–4 साल का साफ़ इतिहास आगे चलकर होम लोन और कार लोन में बहुत काम आता है।

अलग-अलग स्थितियों में क्या करें

अगर आपका नाम किसी ऐसे लोन से जुड़ा है जो आपने लिया ही नहीं

यह पहचान की चोरी (Identity Theft) हो सकती है। तुरंत ब्यूरो पर डिस्प्यूट करें, संबंधित बैंक को लिखित शिकायत दें, और राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। अपने PAN के दुरुपयोग की जांच के लिए समय-समय पर रिपोर्ट मॉनिटर करते रहें।

अगर आपने पर्सनल लोन जल्दी चुकाया है

लोन प्री-क्लोज़ करने के बाद बैंक से NOC ज़रूर लें और 60 दिन बाद रिपोर्ट में स्टेटस जांचें। प्री-क्लोज़र का सही तरीका और उससे जुड़े चार्जेस के बारे में हमारा लेख पर्सनल लोन प्री-क्लोज़र ज़रूर पढ़ें।

अगर आपका कोई क्रेडिट इतिहास ही नहीं है

कोई इतिहास न होने पर स्कोर “NH” या “-1” दिखता है। यह ख़राब स्कोर नहीं, बल्कि खाली स्लेट है। सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड या छोटा गोल्ड लोन लेकर समय पर चुकाने से 6 महीने में स्कोर बनना शुरू हो जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

क्या अपना CIBIL स्कोर बार-बार चेक करने से स्कोर घटता है?

नहीं। खुद स्कोर जांचना सॉफ्ट एंक्वायरी है और इसका कोई असर नहीं होता। केवल लोन या कार्ड के आवेदन पर बैंक द्वारा की गई जांच (हार्ड एंक्वायरी) का असर होता है।

लेट पेमेंट का रिकॉर्ड रिपोर्ट में कितने साल रहता है?

भुगतान इतिहास आम तौर पर कई वर्षों (लगभग 36 महीने या उससे ज़्यादा) तक रिपोर्ट में दिखता है। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है और नए अच्छे रिकॉर्ड जुड़ते हैं, पुरानी गलती का असर कम होता जाता है।

क्या सैलरी या बैंक बैलेंस से क्रेडिट स्कोर बढ़ता है?

नहीं। स्कोर केवल क्रेडिट व्यवहार (लोन और कार्ड) पर आधारित होता है। आपकी आय या बचत सीधे स्कोर में नहीं गिनी जाती, हालांकि लोन देते समय बैंक इन्हें अलग से देखता है।

डेबिट कार्ड या UPI इस्तेमाल करने से स्कोर बनता है?

नहीं, क्योंकि इनमें आप अपना पैसा खर्च करते हैं, उधार नहीं लेते। हालांकि कुछ बैंक अब UPI पर क्रेडिट लाइन देते हैं, जो क्रेडिट की तरह ही रिपोर्ट होती है।

“Minimum Due” भरना काफी है क्या?

मिनिमम ड्यू भरने से खाता “लेट” नहीं माना जाता, लेकिन बाकी रकम पर भारी ब्याज लगता है और उपयोग अनुपात ऊंचा बना रहता है। स्कोर और जेब, दोनों के लिए पूरा बिल भरना ही सही है।

600 से 750 पहुँचने में कितना समय लगता है?

यह कारण पर निर्भर करता है। अगर समस्या ऊंचे उपयोग या रिपोर्ट की गलती की है, तो 2–4 महीने में बड़ा सुधार दिख सकता है। अगर डिफ़ॉल्ट या सेटलमेंट है, तो 9–18 महीने लग सकते हैं।

क्या होम लोन के लिए 700 का स्कोर काफी है?

कई बैंक 700 पर भी होम लोन दे देते हैं, लेकिन सबसे अच्छी ब्याज दरें आम तौर पर 750 या उससे ऊपर के स्कोर पर मिलती हैं। होम लोन जैसे लंबे कर्ज़ पर 0.5% का अंतर भी लाखों रुपये बचा सकता है।

क्या पति-पत्नी का क्रेडिट स्कोर एक-दूसरे को प्रभावित करता है?

नहीं, हर व्यक्ति का स्कोर उसके अपने PAN से जुड़े क्रेडिट खातों पर आधारित होता है। लेकिन अगर आप किसी संयुक्त लोन (Joint Loan) में सह-आवेदक हैं, तो उस लोन का भुगतान इतिहास दोनों की रिपोर्ट में दिखता है। इसलिए संयुक्त लोन में दोनों को ज़िम्मेदारी से भुगतान पर नज़र रखनी चाहिए।

क्या बंद किए गए क्रेडिट कार्ड का असर रिपोर्ट से मिट जाता है?

नहीं, बंद खाते का इतिहास भी कुछ वर्षों तक रिपोर्ट में दिखता रहता है। अगर उस कार्ड का रिकॉर्ड अच्छा था, तो यह आपके लिए फायदेमंद है।

निष्कर्ष

600 का क्रेडिट स्कोर स्थायी सज़ा नहीं है। यह सिर्फ़ इस बात का संकेत है कि आपके पिछले क्रेडिट व्यवहार में कुछ सुधार की ज़रूरत है। सबसे पहले अपनी पूरी रिपोर्ट पढ़ें और गलतियाँ ठीक करवाएं, फिर बकाया चुकाएं, क्रेडिट उपयोग 30% से नीचे लाएं, पुराने कार्ड चालू रखें और नए आवेदनों से दूर रहें।

इन कदमों को 6 से 12 महीने ईमानदारी से निभाइए, और आप देखेंगे कि बैंक खुद आपको बेहतर दरों पर लोन ऑफ़र करने लगेंगे। अच्छा क्रेडिट स्कोर केवल लोन पाने के लिए नहीं, बल्कि बेहतर ब्याज दर, ज़्यादा लिमिट और कई बार नौकरी व किराये के घर के लिए भी काम आता है।

अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। क्रेडिट ब्यूरो के स्कोरिंग मॉडल गोपनीय होते हैं और स्कोर में सुधार का समय हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है। RBI के नियम समय-समय पर बदलते हैं, इसलिए आधिकारिक स्रोत से मौजूदा जानकारी ज़रूर जांचें।

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