अचानक पैसों की ज़रूरत पड़ जाए, जैसे अस्पताल का बिल, बच्चे की फीस, दुकान के लिए माल या घर की मरम्मत, तो दो विकल्प सबसे पहले सामने आते हैं: घर में रखे सोने पर गोल्ड लोन, या बिना किसी गिरवी के पर्सनल लोन। दोनों कुछ ही घंटों या दिनों में मिल जाते हैं, लेकिन इनकी लागत, जोखिम और शर्तों में बहुत बड़ा अंतर है।
ज़्यादातर लोग केवल ब्याज दर देखकर फैसला करते हैं: “गोल्ड लोन 9–10% पर है और पर्सनल लोन 13–16% पर, तो गोल्ड लोन सस्ता है।” लेकिन यह आधी तस्वीर है। इस लेख में हम दिखाएंगे कि कैसे चुकाने का तरीका, अवधि, छिपे शुल्क और आपकी क्रेडिट प्रोफ़ाइल मिलकर असली लागत तय करते हैं। कई बार कम ब्याज दर वाला लोन भी महंगा पड़ जाता है।
गोल्ड लोन क्या है और कैसे काम करता है?
गोल्ड लोन में आप अपने सोने के गहने (या कुछ मामलों में बैंक द्वारा बेचे गए सोने के सिक्के) बैंक या NBFC के पास गिरवी रखते हैं, और उनके मूल्य के एक हिस्से के बराबर लोन मिलता है। लोन चुकाने के बाद आपका सोना वापस मिल जाता है।
गोल्ड लोन की मुख्य बातें:
- LTV (Loan to Value): सोने के बाज़ार मूल्य का जितना प्रतिशत लोन के रूप में मिलता है, उसे LTV कहते हैं। RBI ने इसकी अधिकतम सीमा तय की है। हाल के नियमों में छोटे लोन पर यह सीमा पहले के 75% से बढ़ाकर कुछ श्रेणियों में 85% तक की गई है, जबकि बड़े लोन पर यह कम रहती है। मौजूदा सीमा अपने लेंडर से ज़रूर पूछें।
- सोने की शुद्धता: बैंक आपके गहनों की शुद्धता जांचता है। पत्थर, मीनाकारी और अन्य धातुओं का वज़न घटाकर केवल शुद्ध सोने के वज़न पर मूल्य तय होता है। इसलिए 20 ग्राम के गहने पर शायद 16–17 ग्राम शुद्ध सोने का ही मूल्य गिना जाए।
- क्रेडिट स्कोर की कम भूमिका: चूंकि लोन सुरक्षित है, इसलिए कम क्रेडिट स्कोर वाले या बिना क्रेडिट इतिहास वाले लोगों को भी आसानी से मिल जाता है।
- अवधि: आम तौर पर कुछ महीनों से लेकर 1–3 साल तक।
- त्वरित वितरण: कई जगह 30 मिनट से कुछ घंटों में पैसा मिल जाता है।
गोल्ड लोन चुकाने के तरीके
गोल्ड लोन की सबसे खास बात इसके चुकाने के विकल्प हैं, जो पर्सनल लोन में नहीं मिलते:
- नियमित EMI: हर महीने मूलधन और ब्याज दोनों।
- केवल ब्याज हर महीने, मूलधन अंत में: हर महीने सिर्फ़ ब्याज भरें और अवधि के अंत में पूरा मूलधन एक साथ चुकाएं।
- बुलेट रीपेमेंट: पूरी अवधि में कुछ न भरें, अंत में मूलधन और पूरा ब्याज एक साथ चुकाएं।
- ओवरड्राफ्ट सुविधा: कुछ बैंक सोने के बदले एक लिमिट देते हैं, जिसमें से ज़रूरत के हिसाब से पैसा निकालें और केवल इस्तेमाल की गई रकम पर ब्याज दें।
यह लचीलापन व्यापारियों, किसानों और अनियमित आय वाले लोगों के लिए बहुत उपयोगी है।
पर्सनल लोन क्या है?
पर्सनल लोन एक असुरक्षित (Unsecured) लोन है, यानी इसके लिए आपको कुछ गिरवी नहीं रखना पड़ता। बैंक आपकी आय, नौकरी की स्थिरता और क्रेडिट स्कोर देखकर लोन देता है।
पर्सनल लोन की मुख्य बातें:
- ब्याज दर: आपके क्रेडिट स्कोर और आय पर बहुत निर्भर करती है। अच्छे स्कोर और बड़ी कंपनी में नौकरी वाले को कम दर, जबकि कम स्कोर वाले को काफ़ी ऊंची दर मिलती है।
- राशि: आम तौर पर आपकी मासिक आय के कई गुना तक, बैंक की नीति के अनुसार।
- अवधि: आम तौर पर 1 से 5 साल।
- चुकाने का तरीका: लगभग हमेशा हर महीने की तय EMI।
- प्रोसेसिंग फीस: आम तौर पर लोन राशि का 1% से 3% तक, साथ में GST।
- प्री-क्लोज़र: कई बैंक शुल्क लेते हैं। इसके बारे में विस्तार से हमारे लेख पर्सनल लोन प्री-क्लोज़र में पढ़ें।
असली लागत की तुलना: एक उदाहरण
यहीं पर ज़्यादातर लोग गलती करते हैं। मान लीजिए आपको ₹2,00,000 की 12 महीने के लिए ज़रूरत है। मान लीजिए गोल्ड लोन 10% पर और पर्सनल लोन 15% पर मिल रहा है।
| लोन का प्रकार | चुकाने का तरीका | ब्याज दर | 12 महीने में कुल ब्याज (लगभग) |
|---|---|---|---|
| पर्सनल लोन | मासिक EMI (लगभग ₹18,050) | 15% | ₹16,600 |
| गोल्ड लोन | मासिक EMI (लगभग ₹17,580) | 10% | ₹11,000 |
| गोल्ड लोन | हर महीने केवल ब्याज, मूलधन अंत में | 10% | ₹20,000 |
| गोल्ड लोन | बुलेट (सब कुछ अंत में, मासिक चक्रवृद्धि मानकर) | 10% | लगभग ₹20,900 |
देखिए क्या हुआ। 10% वाला गोल्ड लोन, अगर “केवल ब्याज” या “बुलेट” तरीके से चुकाया जाए, तो 15% वाले पर्सनल लोन से भी महंगा पड़ सकता है। कारण साफ़ है: EMI में हर महीने मूलधन घटता जाता है, इसलिए ब्याज घटते मूलधन पर लगता है। जबकि “केवल ब्याज” में पूरे साल ₹2 लाख पर ब्याज लगता रहता है।
इसमें प्रोसेसिंग फीस भी जोड़ें। पर्सनल लोन पर 2% फीस और GST मिलाकर लगभग ₹4,700 और लगेंगे। गोल्ड लोन पर प्रोसेसिंग फीस आम तौर पर कम होती है, लेकिन कुछ जगह मूल्यांकन शुल्क भी लगता है।
निष्कर्ष: ब्याज दर के साथ-साथ यह भी देखें कि आप किस तरीके से चुकाएंगे, और सभी शुल्क जोड़कर कुल रकम की तुलना करें।
गोल्ड लोन के फायदे
1. कम ब्याज दर: सुरक्षित लोन होने के कारण दर आम तौर पर पर्सनल लोन से कम होती है।
2. क्रेडिट स्कोर की ज़रूरत कम: 600 से कम स्कोर वाले, या जिनका कोई क्रेडिट इतिहास नहीं है, उन्हें भी आसानी से मिल जाता है।
3. आय प्रमाण की ज़रूरत कम: गृहिणियों, किसानों, छोटे व्यापारियों और स्व-रोज़गार वाले लोगों के लिए यह बहुत सुविधाजनक है, जिनके पास सैलरी स्लिप नहीं होती।
4. चुकाने में लचीलापन: जैसा ऊपर बताया, कई विकल्प मिलते हैं।
5. तेज़ वितरण और कम कागज़ी कार्रवाई: आम तौर पर केवल KYC दस्तावेज़ और सोना चाहिए।
6. कम प्री-क्लोज़र शुल्क: कई बैंक गोल्ड लोन जल्दी बंद करने पर कोई शुल्क नहीं लेते या बहुत कम लेते हैं।
गोल्ड लोन के नुकसान और जोखिम
1. सोना खोने का जोखिम: अगर आप समय पर नहीं चुका पाए, तो बैंक नोटिस देकर आपका सोना नीलाम कर सकता है। कई परिवारों के लिए गहनों का भावनात्मक मूल्य उनकी बाज़ार कीमत से कहीं ज़्यादा होता है।
2. सोने की कीमत गिरने पर मार्जिन कॉल: अगर सोने का भाव काफ़ी गिर जाए और LTV तय सीमा से ऊपर चला जाए, तो बैंक आपसे अतिरिक्त पैसा जमा करने या और सोना गिरवी रखने को कह सकता है।
3. कम राशि: आपको उतना ही लोन मिलेगा जितना आपके सोने का मूल्य है। बड़ी ज़रूरत के लिए यह काफी नहीं हो सकता।
4. बुलेट रीपेमेंट का बोझ: अंत में एक साथ बड़ी रकम चुकाना कई लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है, और फिर लोन को रिन्यू करवाने का चक्र शुरू हो जाता है, जिसमें ब्याज बढ़ता जाता है।
5. सुरक्षा और शुद्धता का विवाद: असंगठित या अनधिकृत साहूकारों के पास सोना रखने पर गहने बदलने, शुद्धता कम बताने या खो जाने का ख़तरा होता है। हमेशा RBI पंजीकृत बैंक या NBFC ही चुनें।
पर्सनल लोन के फायदे
1. कुछ गिरवी नहीं: आपकी संपत्ति पूरी तरह सुरक्षित रहती है।
2. बड़ी राशि: अच्छी आय और स्कोर होने पर गोल्ड लोन से कहीं बड़ी राशि मिल सकती है।
3. लंबी अवधि और छोटी EMI: 3–5 साल की अवधि से EMI छोटी हो जाती है।
4. क्रेडिट स्कोर बनाने में मदद: समय पर EMI भरने से आपकी क्रेडिट प्रोफ़ाइल मज़बूत होती है। हालांकि गोल्ड लोन भी क्रेडिट ब्यूरो को रिपोर्ट होता है।
5. डिजिटल और पूरी तरह ऑनलाइन: प्री-अप्रूव्ड ग्राहकों को कुछ ही मिनटों में ऐप से पैसा मिल जाता है।
पर्सनल लोन के नुकसान
1. ऊंची ब्याज दर: खासकर कम क्रेडिट स्कोर वालों के लिए।
2. सख्त पात्रता: स्थिर आय, नौकरी का अनुभव और अच्छा स्कोर ज़रूरी है।
3. प्रोसेसिंग फीस और प्री-क्लोज़र शुल्क: कुल लागत बढ़ जाती है।
4. EMI चूकने पर गंभीर असर: कोई गिरवी नहीं होती, इसलिए बैंक वसूली के लिए कानूनी और रिकवरी प्रक्रिया अपनाता है, और आपका क्रेडिट स्कोर बुरी तरह गिरता है।
किस स्थिति में कौन सा लोन चुनें?
गोल्ड लोन तब बेहतर है जब:
- आपको कम अवधि (3 से 12 महीने) के लिए पैसा चाहिए और आप जानते हैं कि कब पैसा आएगा, जैसे फ़सल बिकने पर, किसी भुगतान के आने पर या बोनस मिलने पर।
- आपका क्रेडिट स्कोर कम है या आय का औपचारिक प्रमाण नहीं है।
- आप व्यापारी हैं और कार्यशील पूंजी (Working Capital) की अस्थायी ज़रूरत है।
- घर में ऐसा सोना पड़ा है जो इस्तेमाल नहीं होता और आप उसे EMI के साथ जल्दी छुड़ा सकते हैं।
पर्सनल लोन तब बेहतर है जब:
- आपको बड़ी राशि और लंबी अवधि (2–5 साल) चाहिए।
- आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा (750+) है और स्थिर सैलरी है, जिससे अच्छी ब्याज दर मिल सकती है।
- आप किसी भी हालत में परिवार के गहने जोखिम में नहीं डालना चाहते।
- आपके पास गिरवी रखने लायक पर्याप्त सोना नहीं है।
न गोल्ड लोन, न पर्सनल लोन, तब जब:
अगर ज़रूरत किसी फ़ालतू खर्च (महंगी छुट्टी, दिखावे की शादी, नया गैजेट) की है, तो कोई भी कर्ज़ लेने से पहले रुकें। कर्ज़ केवल ज़रूरी या आय बढ़ाने वाले कामों के लिए लें। आकस्मिक ख़र्चों के लिए इमरजेंसी फंड बनाना सबसे अच्छा बचाव है।
गोल्ड लोन लेते समय ये सावधानियाँ रखें
- केवल RBI पंजीकृत लेंडर चुनें: बैंक या RBI में पंजीकृत NBFC ही चुनें। स्थानीय साहूकार से बचें।
- मूल्यांकन अपने सामने करवाएं: शुद्धता और वज़न की जांच अपनी आँखों के सामने करवाएं और रसीद पर ग्राम, कैरेट और हर गहने का विवरण लिखवाएं।
- पूरी रसीद और एग्रीमेंट लें: गिरवी रखे हर गहने की सूची, वज़न और फ़ोटो वाला दस्तावेज़ ज़रूर लें।
- ब्याज दर “पेनल” दर भी पूछें: कई लेंडर समय पर न भरने पर ऊंची पेनल ब्याज दर लगाते हैं।
- नीलामी की शर्तें समझें: चूक होने पर कितने दिन बाद नोटिस आता है और नीलामी कैसे होती है, यह पहले से जान लें।
- EMI विकल्प को प्राथमिकता दें: बुलेट विकल्प सुविधाजनक लगता है, लेकिन अंत में बड़ा बोझ बनता है।
- ओवर-बॉरोइंग न करें: पूरे LTV तक लोन लेने के बजाय केवल ज़रूरत भर लें। इससे सोने का भाव गिरने पर मार्जिन कॉल का ख़तरा कम रहता है।
पर्सनल लोन लेते समय ये सावधानियाँ रखें
- कई बैंकों की दरें तुलना करें: लेकिन एक साथ बहुत सारे आवेदन न करें, क्योंकि हर आवेदन से हार्ड एंक्वायरी होती है। पहले ऑनलाइन एलिजिबिलिटी चेक करें।
- KFS ध्यान से पढ़ें: RBI के नियमों के अनुसार हर लेंडर को Key Fact Statement देना होता है, जिसमें APR (सभी शुल्क मिलाकर वार्षिक लागत) लिखी होती है। ब्याज दर की जगह APR की तुलना करें।
- लोन ऐप्स से सावधान: केवल उन्हीं ऐप्स से लोन लें जो किसी RBI पंजीकृत बैंक या NBFC से जुड़े हों। जो ऐप आपके फ़ोन के संपर्क और फ़ोटो तक पहुंच मांगें, उनसे दूर रहें।
- EMI आपकी आय के 40% से ज़्यादा न हो: सभी EMI मिलाकर आपकी शुद्ध मासिक आय के 40% से ऊपर जाने पर बजट बिगड़ने लगता है।
- लोन बीमा ज़बरदस्ती न लें: कई बार लोन के साथ बीमा जोड़ दिया जाता है। यह ज़रूरी नहीं होता; ज़रूरत हो तो अलग से सस्ता टर्म प्लान बेहतर है।
गोल्ड लोन लेने की प्रक्रिया: स्टेप बाय स्टेप
- लेंडर चुनें: अपने बैंक से शुरुआत करें, क्योंकि मौजूदा ग्राहकों को अक्सर बेहतर दर मिलती है। साथ में दो-तीन और बैंक या बड़े NBFC की दरें पूछें।
- दस्तावेज़ तैयार रखें: आधार कार्ड, PAN कार्ड, पते का प्रमाण और पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो। बड़ी राशि के लिए कुछ लेंडर आय का प्रमाण भी मांग सकते हैं।
- सोना लेकर शाखा जाएं: कई लेंडर अब घर पर आकर मूल्यांकन करने की सुविधा भी देते हैं, लेकिन इसमें सोना सौंपने की प्रक्रिया और बीमा की शर्तें पहले समझ लें।
- मूल्यांकन: शाखा का मूल्यांकनकर्ता गहनों की शुद्धता जांचेगा, पत्थरों का वज़न घटाएगा और शुद्ध सोने का मूल्य तय करेगा।
- लोन राशि और शर्तें तय करें: अपनी ज़रूरत के हिसाब से राशि, अवधि और चुकाने का तरीका चुनें।
- एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर: ब्याज दर, पेनल ब्याज, शुल्क, नीलामी की शर्तें और गहनों की सूची ध्यान से पढ़कर ही हस्ताक्षर करें।
- पैसा प्राप्त करें: राशि आम तौर पर बैंक खाते में ट्रांसफर होती है। नकद देने पर RBI ने सीमा तय की है।
- चुकाने के बाद सोना वापस लें: लोन बंद करने पर सोना वापस लेते समय हर गहने को सूची से मिलाकर जांचें और वज़न करवाएं। किसी भी अंतर पर उसी समय लिखित शिकायत करें।
सोने का भाव गिर जाए तो क्या करें?
सोने की कीमत आम तौर पर लंबी अवधि में बढ़ती है, लेकिन कम समय में इसमें तेज़ गिरावट भी आती रही है। अगर आपने पूरे LTV तक लोन लिया है और भाव 10–15% गिर जाता है, तो आपका लोन गिरवी के मूल्य के मुकाबले ज़्यादा हो सकता है। ऐसी स्थिति में लेंडर आपको सूचना भेजकर इनमें से कोई कदम उठाने को कह सकता है:
- लोन का कुछ हिस्सा तुरंत चुकाना, ताकि LTV फिर से सीमा के भीतर आ जाए।
- अतिरिक्त सोना गिरवी रखना।
- तय समय में कुछ न करने पर, नोटिस के बाद गिरवी रखे सोने की नीलामी।
इससे बचने का सबसे आसान तरीका है ज़रूरत से ज़्यादा लोन न लेना। अगर आपके सोने पर ₹2.5 लाख मिल सकते हैं और ज़रूरत ₹1.8 लाख की है, तो ₹1.8 लाख ही लें। इससे आपके पास भाव गिरने के ख़िलाफ़ एक सुरक्षा गुंजाइश बनी रहती है, और ब्याज भी कम देना पड़ता है।
एक आम गलती: “रिन्यू” का चक्र
छोटे शहरों और गाँवों में बहुत से परिवार गोल्ड लोन को बुलेट तरीके से लेते हैं, और अवधि ख़त्म होने पर केवल ब्याज भरकर लोन रिन्यू करवा लेते हैं। यह सिलसिला साल-दर-साल चलता रहता है। कागज़ पर हर बार “केवल ब्याज” भरा जाता है, लेकिन कुछ वर्षों में चुकाया गया कुल ब्याज मूल लोन राशि के बराबर या उससे ज़्यादा हो जाता है, और सोना फिर भी गिरवी ही रहता है।
इस चक्र से बचने के लिए लोन लेते समय ही तय करें कि मूलधन किस स्रोत से और कब चुकाया जाएगा। अगर तय स्रोत नहीं है, तो EMI तरीका चुनें, भले ही हर महीने थोड़ा ज़्यादा देना पड़े। हर EMI के साथ आपका सोना वापस मिलने के एक कदम करीब आता है।
कम क्रेडिट स्कोर वालों के लिए खास रणनीति
अगर आपका स्कोर कम है, तो पर्सनल लोन या तो मिलेगा नहीं या बहुत महंगा मिलेगा। ऐसे में छोटा गोल्ड लोन लेकर EMI तरीके से समय पर चुकाना एक समझदारी भरा कदम है। इससे आपकी ज़रूरत भी पूरी होती है और साफ़ भुगतान का रिकॉर्ड बनकर क्रेडिट स्कोर भी सुधरता है। अपने स्कोर को व्यवस्थित तरीके से सुधारने के लिए हमारा लेख क्रेडिट स्कोर 600 से 750 कैसे करें पढ़ें।
गोल्ड लोन बनाम पर्सनल लोन: एक नज़र में
| मानदंड | गोल्ड लोन | पर्सनल लोन |
|---|---|---|
| गिरवी | सोना ज़रूरी | कुछ नहीं |
| ब्याज दर | आम तौर पर कम | आम तौर पर ज़्यादा, स्कोर पर निर्भर |
| क्रेडिट स्कोर की भूमिका | कम | बहुत ज़्यादा |
| आय प्रमाण | अक्सर ज़रूरी नहीं | ज़रूरी |
| अधिकतम राशि | सोने के मूल्य पर सीमित | आय और स्कोर पर निर्भर, अक्सर बड़ी |
| अवधि | छोटी (1–3 साल तक) | 1–5 साल |
| चुकाने के विकल्प | EMI, केवल ब्याज, बुलेट, ओवरड्राफ्ट | आम तौर पर केवल EMI |
| प्रोसेसिंग फीस | आम तौर पर कम | 1–3% तक |
| प्री-क्लोज़र शुल्क | अक्सर नहीं या कम | अक्सर 2–5% |
| चूक होने पर | सोने की नीलामी | कानूनी वसूली और स्कोर में गिरावट |
| वितरण की गति | बहुत तेज़ | तेज़, प्री-अप्रूव्ड हो तो बहुत तेज़ |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या गोल्ड लोन से CIBIL स्कोर पर असर पड़ता है?
हाँ। बैंक और NBFC गोल्ड लोन की जानकारी भी क्रेडिट ब्यूरो को भेजते हैं। समय पर चुकाने से स्कोर सुधरता है और चूकने पर गिरता है।
क्या सोने के बिस्कुट या ईंट पर गोल्ड लोन मिलता है?
आम तौर पर बैंक केवल गहनों और बैंक द्वारा बेचे गए विशेष सोने के सिक्कों पर ही लोन देते हैं। सोने की ईंट या बिस्कुट पर आम तौर पर लोन नहीं मिलता। नियम लेंडर के अनुसार अलग हो सकते हैं।
गिरवी रखा सोना सुरक्षित रहता है या नहीं?
पंजीकृत बैंक और बड़े NBFC सोने को सुरक्षित तिजोरी में रखते हैं और आम तौर पर उसका बीमा भी होता है। फिर भी रसीद पर हर गहने का विवरण और वज़न लिखवाना ज़रूरी है।
अगर गोल्ड लोन की अवधि ख़त्म हो जाए और पैसा न हो तो?
आप लेंडर से लोन रिन्यू करवाने का अनुरोध कर सकते हैं, जिसके लिए आम तौर पर बकाया ब्याज पहले चुकाना होता है। लेकिन बार-बार रिन्यू करवाना कर्ज़ के चक्र में फंसने जैसा है, इसलिए चुकाने की ठोस योजना बनाएं।
महिलाओं के लिए कौन सा विकल्प बेहतर है?
कई बैंक महिला उधारकर्ताओं को गोल्ड और पर्सनल दोनों लोन पर ब्याज दर में थोड़ी छूट देते हैं। विकल्प का चुनाव ऊपर बताए मानदंडों (राशि, अवधि, आय प्रमाण) के आधार पर ही करें।
क्या गोल्ड लोन पर टैक्स छूट मिलती है?
सामान्य उपयोग के लिए लिए गए गोल्ड लोन पर कोई टैक्स छूट नहीं मिलती। अगर पैसा व्यवसाय या घर बनाने में लगाया गया है, तो कुछ स्थितियों में ब्याज पर कटौती संभव है, इसके लिए कर सलाहकार से बात करें।
गोल्ड लोन और गोल्ड ओवरड्राफ्ट में क्या अंतर है?
गोल्ड लोन में पूरी राशि एक साथ मिलती है और पूरी राशि पर ब्याज लगता है। ओवरड्राफ्ट में एक लिमिट मिलती है, आप ज़रूरत के हिसाब से निकालते हैं, और केवल इस्तेमाल की गई राशि और दिनों पर ब्याज देते हैं। अनियमित ज़रूरत वाले व्यापारियों के लिए ओवरड्राफ्ट ज़्यादा सस्ता पड़ सकता है।
क्या एक ही सोने पर दो जगह से लोन लिया जा सकता है?
नहीं। गिरवी रखा सोना लेंडर के कब्ज़े में रहता है, इसलिए उसी पर दूसरा लोन संभव नहीं है। अगर ज़्यादा राशि चाहिए, तो उसी लेंडर से अतिरिक्त सोना गिरवी रखकर लोन बढ़वाया जा सकता है, या किसी दूसरे विकल्प पर विचार करना होगा।
निष्कर्ष
गोल्ड लोन और पर्सनल लोन में कोई एक “हमेशा बेहतर” नहीं है। छोटी अवधि, कम राशि, कम स्कोर या बिना आय प्रमाण वाली स्थिति में गोल्ड लोन आम तौर पर सस्ता और आसान है, बशर्ते आप इसे EMI तरीके से चुकाएं। बड़ी राशि, लंबी अवधि और अच्छे क्रेडिट स्कोर वाली स्थिति में पर्सनल लोन बेहतर हो सकता है, और इसमें आपके गहने भी सुरक्षित रहते हैं।
फैसला लेने से पहले केवल ब्याज दर नहीं, बल्कि चुकाने का तरीका, सभी शुल्क और APR जोड़कर कुल लागत की तुलना करें। और सबसे ज़रूरी, उतना ही उधार लें जितना आप आराम से और समय पर लौटा सकें।
अस्वीकरण: इस लेख में दिए गए आंकड़े केवल समझाने के लिए अनुमानित हैं। ब्याज दरें, LTV सीमा और अन्य नियम RBI और लेंडर द्वारा समय-समय पर बदले जाते हैं। लोन लेने से पहले लेंडर से लिखित शर्तें और Key Fact Statement ज़रूर लें।