टोंक जिला राजस्थान के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध जिला है। इसे “राजस्थान का लखनऊ”, “नवाबों की नगरी”, “अदब का गुलशन” और “मीठे खरबूजों का चमन” जैसे उपनामों से जाना जाता है। यह राजस्थान का एकमात्र ऐसा रियासत था जहां मुस्लिम शासकों का राज था।
टोंक शहर जयपुर से लगभग 95-100 किलोमीटर दक्षिण में बनास नदी के दाहिने किनारे पर स्थित है और जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है। यह शहर अपनी पुरानी हवेलियों, मस्जिदों और हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए प्रसिद्ध है।

मुख्य बिंदु:
- राज्य: राजस्थान
- मंडल: अजमेर
- क्षेत्रफल: 7,194 वर्ग किलोमीटर
- जनसंख्या: 14,21,326 (2011 की जनगणना के अनुसार)
- साक्षरता दर: 62.46%
- जिला कोड: RJ-26
टोंक का इतिहास
प्राचीन इतिहास
टोंक का इतिहास अत्यंत प्राचीन है और यह बैराठ संस्कृति और सभ्यता से जुड़ा हुआ है। महाभारत काल में इसे “सम्वाद लक्ष्य” के नाम से जाना जाता था।
ऐतिहासिक कालक्रम:
- मौर्य साम्राज्य (लगभग 322-185 ईसा पूर्व): यह क्षेत्र मौर्यों के अधीन था और बाद में मालवों में विलय हो गया।
- हर्षवर्धन का शासन (606-647 ई.): अधिकांश क्षेत्र हर्षवर्धन के साम्राज्य के अधीन था। चीनी यात्री ह्वेन सांग के अनुसार, यह बैराठ राज्य के अधीन था।
- राजपूत शासन: राजपूत शासन काल में, इस राज्य के कुछ हिस्से चावड़ा, सोलंकी, कछवाहा, सिसोदिया और चौहान राजवंशों के अधीन रहे।
मध्यकाल
मुगल काल के दौरान, जयपुर के राजा मान सिंह ने अकबर के शासनकाल में तारी और टोकरा जनपद को जीता। 1643 में टोकरा जनपद के 12 गांव भोला ब्राह्मण को दिए गए, जिन्होंने बाद में इन 12 गांवों को ‘टोंक’ नाम दिया।
इसके बाद यह क्षेत्र होल्कर और सिंधिया के शासन के अधीन रहा।
टोंक रियासत की स्थापना (1817)
नवाब मोहम्मद अमीर खान (1769-1834) ने टोंक रियासत की आधारशिला रखी। वे पश्तून मूल के थे और बुनेर जिले (अब पाकिस्तान में) के सलारज़ई उपजनजाति से संबंधित यूसुफज़ई पठान थे।
प्रमुख घटनाक्रम:
- 1798: अमीर खान मराठा साम्राज्य के यशवंतराव होल्कर की सेवा में एक सैन्य कमांडर बने।
- 1806: होल्कर ने अमीर खान को उनकी सेवाओं के लिए टोंक की रियासत प्रदान की। अमीर खान ने बलवंत राव होल्कर से इस क्षेत्र को जीता।
- 1817: तीसरे आंग्ल-मराठा युद्ध के बाद, अमीर खान ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ एक संधि पर हस्ताक्षर किए। ब्रिटिश सरकार ने उन्हें नवाब की उपाधि प्रदान की और उन्हें टोंक का आनुवंशिक शासक मान्यता दी।
- 1818: टोंक शहर की स्थापना हुई।
- 17-तोपों की सलामी: टोंक के नवाब को ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा 17-तोपों की सलामी का सम्मान प्राप्त था।
ब्रिटिश राज (1817-1947)
टोंक रियासत राजपूताना एजेंसी की देखरेख में एक रियासत बन गई। यह राजस्थान और मध्य प्रदेश की वर्तमान सीमाओं में फैली छह अलग-अलग जिलों से मिलकर बनी थी।
रियासत में निम्नलिखित क्षेत्र शामिल थे:
- राजपूताना एजेंसी के तहत: टोंक, अलीगढ़, निम्बाहेड़ा
- केंद्रीय भारतीय एजेंसी के तहत: छबड़ा, पिरावा, सिरोंज
1885 में टोंक में नगरपालिका की स्थापना हुई।
स्वतंत्रता के बाद (1947-1949)
1947 में भारत विभाजन के समय, टोंक के नवाब ने भारत संघ में विलय का निर्णय लिया। 7 अप्रैल 1949 को टोंक रियासत का राजस्थान राज्य में विलय हो गया।
शासकों का इतिहास
टोंक के नवाब (1817-1949)
टोंक रियासत पर पठान नवाबों का शासन रहा। प्रमुख शासक निम्नलिखित थे:
1. नवाब मोहम्मद अमीर खान (1817-1834)
- टोंक रियासत के संस्थापक
- सलारज़ई पठान वंश से
- 1798 में होल्कर की सेना में सैन्य कमांडर
- 1817 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ संधि
- नवाब की उपाधि प्राप्त
2. नवाब सर मोहम्मद इब्राहिम अली खान GCIE (1867-1930)
- टोंक के चौथे नवाब
- 1877 में लॉर्ड लिटन के दरबार और 1903 के दिल्ली दरबार में भाग लेने वाले कुछ शासकों में से एक
- संगीत, नृत्य और कविता के शौकीन
- सुनहरी कोठी (सोने की हवेली) का निर्माण पूरा करवाया
3. नवाब मोहम्मद इस्माइल अली खान (1947-1949)
- अंतिम नवाब जिन्होंने 1948 में राजस्थान में विलय के समय शासन किया
नवाबों का योगदान
टोंक के नवाब साहित्य और संस्कृति के महान संरक्षक थे। उन्होंने:
- अरबी और फारसी पांडुलिपियों का विशाल पुस्तकालय बनवाया
- हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा दिया
- मिलाद-उन-नबी के धार्मिक आयोजनों में जाति, रंग और पंथ के भेदभाव के बिना सभी लोगों को आमंत्रित किया
भौगोलिक स्थिति
स्थान और सीमाएं
अक्षांश: 25°42′ से 26°34′ उत्तर
देशांतर: 75°07′ से 76°19′ पूर्व
क्षेत्रफल: 7,194 वर्ग किलोमीटर
समुद्र तल से ऊंचाई: 256-320 मीटर
सीमावर्ती जिले:
- उत्तर: जयपुर जिला
- पूर्व: सवाई माधोपुर जिला
- दक्षिण: बूंदी, कोटा और भीलवाड़ा जिले
- पश्चिम: अजमेर जिला
भूगोल और जलवायु
टोंक जिला मुख्य रूप से एक समतल पेनिप्लेन है जिसमें मोटी जलोढ़ आवरण है। जिले का पूर्वी भाग पहाड़ी है।
प्रमुख भौगोलिक विशेषताएं:
- राजकोट बनेटा पहाड़ियां: पूर्वी भाग में
- राजमहल-टोडा रायसिंह रिज: दक्षिणी भाग में
नदियां
बनास नदी जिले की मुख्य नदी है, जो टोंक शहर के पास बहती है।
अन्य नदियां और सहायक नदियां:
- मानसी नदी: बनास की मुख्य सहायक नदी
- सोहादरा नदी: तोरडी सागर टैंक को पानी देती है (राजस्थान की सबसे बड़ी सिंचाई टैंक)
- खारी, डाइन, बांडी और गलवा: छोटी नदियां
जलवायु
टोंक की जलवायु अर्ध-शुष्क राजस्थान से अलग है और मध्य प्रदेश की उप-आर्द्र जलवायु के समान है।
- ग्रीष्मकाल (मई-जून): तापमान 45°C से अधिक
- शीतकाल (नवंबर-फरवरी): औसत तापमान 22°C, न्यूनतम 4-5°C
- वार्षिक वर्षा: लगभग 508-758.9 मिमी
- मानसून: जुलाई से सितंबर
प्रशासनिक संरचना और तहसीलें
प्रशासनिक विभाजन
टोंक जिला अजमेर मंडल के अंतर्गत आता है।
जिला स्तर के अधिकारी:
- जिला कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट (मुख्य प्रशासनिक अधिकारी)
- एक अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट
- पुलिस अधीक्षक (SP)
- मुख्य चिकित्सा अधिकारी
तहसीलें और उप-विभाग
टोंक जिले में 9 तहसीलें और 7 उप-विभाग हैं:
9 तहसीलें:
- टोंक – सबसे बड़ी तहसील (जनसंख्या के अनुसार: 2,86,808)
- मालपुरा – सबसे बड़ी तहसील (क्षेत्रफल के अनुसार: 1,490 वर्ग किमी)
- नीवाई
- टोडारायसिंह
- देवली
- पीपलू – सबसे छोटी तहसील (क्षेत्रफल और जनसंख्या दोनों में)
- उनियारा
- दूनी
- नागरफोर्ट
7 उप-विभाग:
- टोंक
- मालपुरा
- नीवाई
- टोडारायसिंह
- देवली
- पीपलू
- अलीगढ़ (उनियारा)
नगरीय निकाय
- नगर परिषद: टोंक
- नगर पालिका: देवली, मालपुरा, नीवाई, टोडारायसिंह और उनियारा
पंचायत समितियां
जिले में 6 पंचायत समितियां हैं, प्रत्येक का प्रमुख एक ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) होता है।
गांव
जिले में लगभग 1,093-1,116 गांव हैं।
वर्तमान प्रशासनिक अधिकारी
संपर्क जानकारी (2025)
जिला कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट, टोंक
- आधिकारिक वेबसाइट: https://tonk.rajasthan.gov.in
- कार्यालय: 01432-243026, 246377
- आवास: 01432-243025
पुलिस अधीक्षक (SP), टोंक
- कार्यालय: 01432-243028
- आवास: 01432-243029
- मोबाइल: 9829023831
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO)
- कार्यालय: 01432-244099
- आवास: 01432-244253
- मोबाइल: 9414340656
जिला परिवहन अधिकारी (DTO)
- कार्यालय: 01432-242588
आपातकालीन नंबर
- पुलिस: 100
- एम्बुलेंस: 102
- अग्निशमन: 101
- अस्पताल: (स्थानीय नंबर)
नोट: वर्तमान अधिकारियों के नाम समय-समय पर बदलते रहते हैं। नवीनतम जानकारी के लिए आधिकारिक सरकारी वेबसाइट देखें।
प्रमुख पर्यटन स्थल
टोंक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के कई पर्यटन स्थलों से समृद्ध है।
1. सुनहरी कोठी (सोने की हवेली)
सुनहरी कोठी या शीश महल टोंक का मुख्य आकर्षण है।

विशेषताएं:
- निर्माण: 1824 में नवाब अमीर खान द्वारा शुरू, नवाब मोहम्मद इब्राहिम अली खान के शासनकाल में पूर्ण
- निर्माण लागत: 10 लाख रुपये
- स्थान: बड़ा कुआं के पास, नजर बाग रोड
- वास्तुकला: फारसी और राजपूत शैली का मिश्रण
- विशिष्टता:
- बाहर से साधारण लेकिन अंदर से शानदार सोने के रंग का इंटीरियर
- दर्पण, गिल्ट, स्टुको और बेल्जियम के रंगीन कांच से सजाया गया
- शीश महल में अद्भुत कांच और फूलों का काम
- मीनाकारी के उत्कृष्ट नमूने
- स्थिति: राजस्थान सरकार द्वारा महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्मारक घोषित
2. अरबी और फारसी शोध संस्थान
मौलाना अबुल कलाम आज़ाद अरबी फ़ारसी शोध संस्थान (1978 में स्थापित)
विशेषताएं:
- स्थान: टोंक शहर के मध्य में रसिया और अन्नपूर्णा पहाड़ियों की घाटी में
- उद्देश्य: अरबी और फारसी पांडुलिपियों का संरक्षण
- संग्रह:
- 12वीं से 17वीं शताब्दी की दुर्लभ अरबी और फारसी पांडुलिपियां
- कुछ प्राचीन पुस्तकें सोने, पन्ना, मोती और माणिक से सजाई गई हैं
- कला दीर्घा: 2002 में शुरू, सुंदर कला और खूबसूरत सुलेख डिजाइन प्रदर्शित करती है
3. शाही जामा मस्जिद
राजस्थान की सबसे बड़ी और भव्य मस्जिदों में से एक।
विशेषताएं:
- इस्लामी और राजपूत वास्तुकला का अद्भुत मिश्रण
- अंदर और बाहर से नाजुक फ्रेस्को के साथ सजाया गया
- दिल्ली मुगल शैली की वास्तुकला
4. बिसलपुर बांध
बिसलपुर बांध बनास नदी पर बना एक महत्वपूर्ण जलाशय है।
तकनीकी विवरण:
- निर्माण काल: 1985-1999
- लंबाई: 574 मीटर
- ऊंचाई: 39.5 मीटर
- भंडारण क्षमता: 1,095.84 मिलियन क्यूबिक मीटर (सकल)
- सिंचाई क्षमता: 81,800 हेक्टेयर (टोंक जिले में)
महत्व:
- जयपुर की जीवन रेखा: जयपुर शहर के लगभग आधे क्षेत्रों को पानी की आपूर्ति
- पेयजल आपूर्ति: जयपुर, अजमेर, टोंक, भीलवाड़ा जिलों को
- सिंचाई: सवाई माधोपुर और टोंक जिलों को
- पुष्कर झील को भी पानी मिलता है
पर्यटन:
- अरावली पहाड़ियों से घिरा सुंदर दृश्य
- मानसून के बाद सबसे आकर्षक
- “राजस्थान का मिनी माउंट आबू” कहा जाता है
- नौका विहार, पक्षी देखना, पिकनिक के लिए आदर्श
- शीतकाल में प्रवासी पक्षी
5. हाथी भाटा
विशेषताएं:
- स्थान: टोंक-सवाई माधोपुर राजमार्ग से लगभग 20-30 किमी
- विशिष्टता: एक ही पत्थर से बना विशाल हाथी
- निर्माणकाल: 12वीं-13वीं शताब्दी
- निर्माता: राम नाथ स्लैट ने सवाई राम सिंह के शासनकाल में निर्मित
- शिलालेख: नल और दमयंती की कहानी
6. दिग्गी कल्याणजी मंदिर

- आयु: लगभग 5,600 वर्ष पुराना
- देवता: श्री कल्याणजी (भगवान विष्णु का अवतार)
- विशेषता: संभवतः सबसे पुराने कार्यशील हिंदू मंदिरों में से एक
- स्थान: टोंक से लगभग 60 किमी
- वास्तुकला: शिखर 16 स्तंभों द्वारा समर्थित
- प्रसिद्ध तीर्थ स्थल
7. बिसालदेव मंदिर (बिसलपुर)

- निर्माता: चाहमाण शासक विग्रहराज चतुर्थ (बिसाल देव)
- निर्माण काल: 12वीं शताब्दी ई.
- समर्पित: गोकर्णेश्वर (भगवान शिव)
- स्थान: बिसलपुर बांध के पास
- राष्ट्रीय महत्व का स्मारक
- बॉलीवुड कनेक्शन: फिल्म ‘पहेली’ (शाहरुख खान, अमिताभ बच्चन) की शूटिंग यहां हुई
8. हाड़ी रानी की बावड़ी (हाड़ी रानी का कुंड)
- 17वीं शताब्दी की वास्तुशिल्प उत्कृष्टता
- सुंदर गलियारे और ऐतिहासिक नक्काशी
- बॉलीवुड फिल्म ‘पहेली’ में दिखाया गया
9. अन्य आकर्षण
- अन्नपूर्णा डुंगरी गणेश मंदिर
- रसिया की टेकरी
- किदवई पार्क
- घंटाघर
- नेहरू गार्डन
- चतुर्भुज तालाब
आधुनिक विकास और सुविधाएं
शिक्षा
प्रमुख शैक्षणिक संस्थान:
- राजस्थान विश्वविद्यालय से संबद्ध सरकारी कॉलेज
- राजस्थान लेदर टेक्नोलॉजी संस्थान (Rajasthan Institute of Leather Technology)
- बनस्थली विद्यापीठ (महिला विश्वविद्यालय) – निकटवर्ती क्षेत्र में
- विभिन्न माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय
साक्षरता दर (2011):
- कुल: 62.46%
- पुरुष: 77.68%
- महिला: 59.18%
स्वास्थ्य सुविधाएं
- जिला सदर अस्पताल, टोंक
- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विभिन्न तहसीलों में
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में
- निजी अस्पताल और क्लीनिक
उद्योग और व्यापार
टोंक जिला मुख्य रूप से कृषि-आधारित है, लेकिन कई उद्योग भी हैं:
प्रमुख उद्योग:
- चमड़ा उद्योग: राजस्थान लेदर इंडस्ट्रीज लिमिटेड
- कपड़ा उद्योग: कपास बुनाई
- ऊन कार्डिंग
- लेदर टैनिंग
- हस्तशिल्प और फेल्ट उत्पादन
RIICO औद्योगिक क्षेत्र: टोंक, नीवाई, मालपुरा और देवली तहसीलों में 6 RIICO औद्योगिक क्षेत्र हैं, जिनमें लगभग 600 एकड़ भूमि औद्योगिक उद्देश्यों के लिए अधिग्रहित की गई है।
परिवहन और संपर्क
सड़क मार्ग:
- राष्ट्रीय राजमार्ग 52 टोंक से गुजरता है
- जयपुर से 95-100 किमी दक्षिण
- राज्य परिवहन की नियमित बस सेवाएं
रेल मार्ग: टोंक सीधे रेल से नहीं जुड़ा है (राजस्थान के 4 जिला मुख्यालयों में से एक)
- निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन: बनस्थली-नीवाई (लगभग 35 किमी)
- जिले में अन्य रेलवे स्टेशन: चौथ का बरवाड़ा, इसरदा, चन्नानी, सुरेली, सिरस
हवाई मार्ग:
- निकटतम हवाई अड्डा: जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (सांगानेर) – लगभग 81-150 किमी
रोचक तथ्य
1. राजस्थान का लखनऊ
टोंक को “राजस्थान का लखनऊ” कहा जाता है क्योंकि:
- नवाबी संस्कृति और शिष्टाचार
- उर्दू साहित्य और कविता का केंद्र
- हिंदू-मुस्लिम सांस्कृतिक सद्भाव
2. मीठे खरबूजों का चमन
टोंक मीठे खरबूजों के लिए प्रसिद्ध है। यहां के खरबूजे अपनी मिठास और स्वाद के लिए पूरे राजस्थान में जाने जाते हैं।
3. अनोखी सांस्कृतिक विरासत
- हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक: नवाबों के शासनकाल में, मिलाद-उन-नबी के धार्मिक कार्यक्रमों में जाति, रंग और पंथ के भेदभाव के बिना सभी स्थानीय लोगों को रबीउल अव्वल के महीने में सात दिनों तक आमंत्रित किया जाता था।
4. राजस्थान का एकमात्र मुस्लिम रियासत
टोंक राजस्थान की एकमात्र रियासत थी जहां 19वीं शताब्दी में मुस्लिम शासकों का राज था।
5. रोमांटिक कवि की नगरी
प्रसिद्ध रोमांटिक उर्दू कवि अख्तर शीरानी से जुड़ाव के कारण टोंक को “शीरानी की नगरी” भी कहा जाता है।
6. सिनेमा कनेक्शन
- 1981-82: कमाल अमरोही की फिल्म ‘रज़िया सुल्तान’ की शूटिंग टोंक में हुई
- बिसालदेव मंदिर और हाड़ी रानी बावड़ी में फिल्म ‘पहेली’ की शूटिंग
7. ऐतिहासिक महत्व
- बैराठ संस्कृति से जुड़ा प्राचीन इतिहास
- महाभारत काल में “सम्वाद लक्ष्य” के नाम से जाना जाता था
- चीनी यात्री ह्वेन सांग ने इस क्षेत्र का उल्लेख किया
8. अद्वितीय वास्तुकला
टोंक में राजपूत और मुगल वास्तुकला का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है – पुरानी हवेलियां, मस्जिदें और ब्रिटिश औपनिवेशिक इमारतें।
9. खनिज संपदा
जिले में अभ्रक (mica) और बेरिलियम के भंडार हैं जिनका खनन किया जाता है।
10. जैव विविधता
टोंक जिले के उनियारा उपखंड के रानीपुरा ग्राम पंचायत में काले हिरण (कृष्ण मृग) प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
जनसांख्यिकी
जनसंख्या आंकड़े (2011 की जनगणना)
कुल जनसंख्या: 14,21,326
ग्रामीण-शहरी विभाजन:
- ग्रामीण: 11,03,603 (77.65%)
- शहरी: 3,17,723 (22.35%)
लिंग अनुपात:
- प्रति 1000 पुरुषों पर 949 महिलाएं
जनसंख्या घनत्व: 198 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी
लिंग-वार जनसंख्या:
- पुरुष: 7,29,457
- महिला: 6,92,254
साक्षरता
कुल साक्षरता दर: 62.46%
साक्षर जनसंख्या: 9,40,604
- पुरुष: 4,78,329 (77.68%)
- महिला: 2,71,330 (59.18%)
निरक्षर जनसंख्या: 6,71,667
- पुरुष: 2,49,807
- महिला: 4,21,860
बाल जनसंख्या (0-6 वर्ष)
कुल: 2,04,038
- बालक: 1,07,868
- बालिकाएं: 96,170
अनुसूचित जाति और जनजाति
अनुसूचित जाति (SC): 2,87,903 (20.26%)
- पुरुष: 1,48,110
- महिला: 1,39,793
अनुसूचित जनजाति (ST): 1,78,207 (12.54%)
- पुरुष: 92,677
- महिला: 85,530
परिवार
कुल परिवार: 2,66,870
- ग्रामीण: 2,12,126
- शहरी: 54,744
- औसत परिवार का आकार: 5.33 सदस्य
जनसंख्या वृद्धि
2001-2011 दशक की वृद्धि दर: 17.33%
अर्थव्यवस्था
कृषि
टोंक जिला मुख्य रूप से कृषि-आधारित है। कृषि और पशुपालन लोगों के मुख्य व्यवसाय हैं।
प्रमुख फसलें:
- अनाज: ज्वार, गेहूं, मक्का
- दलहन: चना (ग्राम)
- तिलहन: विभिन्न तेल बीज
- नकदी फसल: कपास, तम्बाकू
- बागवानी: खरबूजे (प्रसिद्ध)
सिंचाई:
- बिसलपुर बांध परियोजना से 81,800 हेक्टेयर सिंचाई
- दाहिनी मुख्य नहर: 51.64 किमी (18.34 क्यूमेक क्षमता)
- बाईं किनारे की नहर: 19.0 किमी (2.25 क्यूमेक क्षमता)
पशुपालन
- मवेशी, भैंस, भेड़, बकरी पालन
- मुर्गी पालन: पोल्ट्री फार्म
- मत्स्य पालन: फिशरीज
उद्योग
जिले में औद्योगिक विकास अपेक्षाकृत पिछड़ा है, लेकिन राज्य सरकार लघु, मध्यम और हस्तशिल्प उद्योगों को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है।
महत्वपूर्ण उद्योग:
- चमड़ा उद्योग और टैनिंग
- कपड़ा और कपास बुनाई
- हस्तशिल्प और फेल्ट उत्पादन
- खादी ग्रामोद्योग
पंजीकृत कंपनियां: कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) में टोंक में 101 पंजीकृत कंपनियां
खनन
- अभ्रक (Mica)
- बेरिलियम
व्यापार और वाणिज्य
टोंक क्षेत्र का मुख्य कृषि बाजार और विनिर्माण केंद्र है।
कैसे पहुंचें
हवाई मार्ग से
निकटतम हवाई अड्डा: जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (सांगानेर)
- दूरी: लगभग 81-150 किमी
- समय: 1.5-2 घंटे सड़क मार्ग से
- जयपुर हवाई अड्डा दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु आदि प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है
- हवाई अड्डे से टैक्सी या बस सेवाएं उपलब्ध हैं
रेल मार्ग से
टोंक शहर सीधे रेल से नहीं जुड़ा है (राजस्थान के 4 जिला मुख्यालयों में से एक जो सीधे रेल से नहीं जुड़े हैं)।
निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन:
- बनस्थली-नीवाई रेलवे स्टेशन: लगभग 35 किमी
- यहां से टोंक के लिए स्थानीय बस या टैक्सी उपलब्ध है
अन्य निकटवर्ती स्टेशन:
- चौथ का बरवाड़ा
- भंवर टोंक
सड़क मार्ग से
टोंक सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
प्रमुख शहरों से दूरी:
- जयपुर: 95-100 किमी (लगभग 1.5-2 घंटे)
- अजमेर: लगभग 70 किमी
- बूंदी: लगभग 94 किमी
- सवाई माधोपुर: लगभग 67 किमी
- कोटा: लगभग 150 किमी
- दिल्ली: लगभग 350 किमी
परिवहन सुविधाएं:
- राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (RSRTC) की नियमित बस सेवाएं
- निजी बस सेवाएं
- टैक्सी और कैब सेवाएं उपलब्ध
राष्ट्रीय राजमार्ग: NH-52 टोंक से होकर गुजरता है
घूमने का सर्वोत्तम समय
शीतकाल (अक्टूबर से मार्च): टोंक घूमने का सबसे अच्छा समय
कारण:
- सुखद मौसम (10-25°C)
- दर्शनीय स्थलों की यात्रा के लिए आदर्श
- बिसलपुर बांध मानसून के बाद पूरी तरह भरा होता है
- त्योहार और सांस्कृतिक कार्यक्रम
ग्रीष्मकाल (अप्रैल से जून): बहुत गर्म (तापमान 45°C तक)
मानसून (जुलाई से सितंबर): मध्यम वर्षा, हरियाली
निष्कर्ष
टोंक राजस्थान का एक अनूठा जिला है जो अपनी ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक विविधता और हिंदू-मुस्लिम सद्भाव के लिए प्रसिद्ध है। यह जिला नवाबों की नगरी, राजस्थान का लखनऊ और मीठे खरबूजों का चमन जैसे उपनामों से जाना जाता है।
सुनहरी कोठी, अरबी-फारसी शोध संस्थान, बिसलपुर बांध, और हाथी भाटा जैसे दर्शनीय स्थल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। टोंक का इतिहास प्राचीन बैराठ संस्कृति से लेकर नवाब अमीर खान द्वारा 1818 में स्थापना तक फैला हुआ है।
आज, टोंक एक विकासशील जिला है जो अपनी कृषि, उद्योग और शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति कर रहा है। यह जिला न केवल इतिहास प्रेमियों के लिए बल्कि संस्कृति और प्रकृति के प्रेमियों के लिए भी एक आदर्श गंतव्य है।
(FAQ)
1. टोंक किस लिए प्रसिद्ध है? टोंक अपनी सुनहरी कोठी, अरबी-फारसी शोध संस्थान, बिसलपुर बांध, मीठे खरबूजों और नवाबी संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है।
2. टोंक की स्थापना किसने की? नवाब मोहम्मद अमीर खान ने 1818 में टोंक शहर की स्थापना की।
3. टोंक जयपुर से कितनी दूर है? टोंक जयपुर से लगभग 95-100 किलोमीटर दक्षिण में है।
4. टोंक में कितनी तहसीलें हैं? टोंक जिले में 9 तहसीलें हैं: टोंक, मालपुरा, नीवाई, टोडारायसिंह, देवली, पीपलू, उनियारा, दूनी और नागरफोर्ट।
5. बिसलपुर बांध का क्या महत्व है? बिसलपुर बांध जयपुर की जीवन रेखा है और जयपुर, अजमेर, टोंक जिलों को पेयजल और सिंचाई सुविधा प्रदान करता है।
