गुरुवार, 30 अक्टूबर 2025 – आज का दिन बेहद शुभ और फलदायी है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के साथ आज गोपाष्टमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। गुरुवार का दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए उत्तम माना जाता है। आज गाय माता की पूजा का विशेष महत्व है। यदि आप कोई नया व्यापार शुरू करना चाहते हैं, वाहन खरीदना चाहते हैं, या कोई मांगलिक कार्य करना चाहते हैं तो आज का दिन अत्यंत शुभ है। बस राहुकाल (दोपहर 1:34 बजे से 3:00 बजे) से बचें।
विस्तृत पंचांग विवरण – 30 अक्टूबर 2025
दिनांक और वार
- अंग्रेजी तिथि: 30 अक्टूबर 2025
- वार (दिन): गुरुवार (बृहस्पतिवार)
- विक्रम संवत: 2082, कालयुक्त संवत्सर
- शक संवत: 1947
- पक्ष: शुक्ल पक्ष
- मास: कार्तिक मास
- ऋतु: हेमंत ऋतु
तिथि विवरण
आज दो तिथियां प्रभावी रहेंगी:
1. कार्तिक शुक्ल पक्ष अष्टमी
- प्रारंभ: 29 अक्टूबर 2025, प्रातः 09:23 बजे से
- समापन: 30 अक्टूबर 2025, प्रातः 10:06/10:07 बजे तक
- विशेष: यह गोपाष्टमी का पावन दिन है
2. कार्तिक शुक्ल पक्ष नवमी
- प्रारंभ: 30 अक्टूबर 2025, प्रातः 10:06/10:07 बजे से
- समापन: 31 अक्टूबर 2025, प्रातः 10:03 बजे तक
चूंकि अष्टमी तिथि सूर्योदय के समय विद्यमान है, इसलिए उदया तिथि के अनुसार आज गोपाष्टमी का पर्व 30 अक्टूबर को मनाया जा रहा है।
नक्षत्र (Nakshatra)
श्रवण नक्षत्र
- प्रभावी समय: 30 अक्टूबर को संध्या 06:34 बजे तक
- इसके बाद: धनिष्ठा नक्षत्र का प्रारंभ
श्रवण नक्षत्र भगवान विष्णु का नक्षत्र है और यह सुनने, सीखने और ज्ञान प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
योग
आज दो योग प्रभावी रहेंगे:
1. शूल योग
- समापन समय: प्रातः 07:20/07:50 बजे तक
- प्रकृति: अशुभ योग
- इस समय में कोई भी नया या शुभ कार्य प्रारंभ न करें
2. गण्ड योग
- प्रारंभ: प्रातः 07:20 बजे के बाद
- समापन: अगले दिन तक
- प्रकृति: अशुभ योग
- इस योग में भी शुभ कार्यों से बचना चाहिए
सुझाव: चूंकि पूरे दिन गण्ड योग रहेगा, इसलिए अत्यंत आवश्यक कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त या चौघड़िया के शुभ समय का चयन करें।
करण (Karana)
दिनभर में तीन करण प्रभावी रहेंगे:
1. बव करण
- समापन: प्रातः 10:07 बजे तक
- प्रकृति: चर करण (शुभ)
2. बालव करण
- प्रारंभ: प्रातः 10:07 बजे से
- समापन: रात्रि 10:12 बजे तक
- प्रकृति: चर करण (शुभ)
3. कौलव करण
- प्रारंभ: रात्रि 10:12 बजे के बाद
- प्रकृति: चर करण (शुभ)
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
सूर्योदय और सूर्यास्त (दिल्ली के अनुसार):
- सूर्योदय: प्रातः 06:31 बजे
- सूर्यास्त: संध्या 05:37/05:38 बजे
- दिन की अवधि: लगभग 11 घंटे 06 मिनट
चंद्रोदय और चंद्रास्त:
- चंद्रोदय: दोपहर 01:41/01:42 बजे
- चंद्रास्त: अगली सुबह 00:41 बजे (31 अक्टूबर की रात)
चंद्र राशि:
- आज चंद्रमा मकर राशि में विराजमान है
- प्रभाव: मकर राशि का चंद्रमा व्यावहारिकता, अनुशासन और कर्मठता प्रदान करता है
सूर्य राशि:
- सूर्य तुला राशि में स्थित है
अशुभ काल (आज इन समयों में शुभ कार्य न करें)
राहुकाल (Rahu Kaal Today)
गुरुवार को राहुकाल दोपहर में रहता है:
- समय: दोपहर 01:34 बजे से 03:00 बजे तक (लगभग 1.5 घंटे)
महत्वपूर्ण सूचना: राहुकाल के दौरान किसी भी नए कार्य की शुरुआत, यात्रा, विवाह, गृह प्रवेश, वाहन खरीदी, व्यापार प्रारंभ जैसे शुभ कार्य बिल्कुल न करें। हालांकि, पहले से चल रहे कार्य जारी रख सकते हैं।
यमघंट काल
- समय: प्रातः 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक (लगभग)
- इस समय में भी शुभ कार्यों से बचें
गुलिक काल
- समय: प्रातः 09:00 बजे से 10:30 बजे तक (लगभग)
- यह भी अशुभ समय माना जाता है
दुर्मुहूर्त
आज के दुर्मुहूर्त (अशुभ समय):
- प्रातःकाल: 10:15 बजे से 11:00 बजे तक
- रात्रि: 11:45 बजे से 12:30 बजे तक (मध्यरात्रि के बाद)
ध्यान दें: इन सभी अशुभ समयों में कोई भी शुभ या महत्वपूर्ण कार्य प्रारंभ न करें।
शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat Today)
अभिजीत मुहूर्त (सर्वोत्तम मुहूर्त)
- समय: दोपहर 11:49 बजे से 12:35 बजे तक
- अवधि: लगभग 46 मिनट
- विशेष: यह दिन का सबसे शुभ समय है। किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के लिए यह समय सर्वोत्तम है।
- उपयोग: विवाह, व्यापार प्रारंभ, वाहन खरीदी, यात्रा, परीक्षा, साक्षात्कार आदि सभी के लिए उत्तम
नोट: बुधवार को छोड़कर सभी दिनों में अभिजीत मुहूर्त शुभ होता है। आज गुरुवार है, इसलिए यह पूर्णतः शुभ है।
ब्रह्म मुहूर्त
- समय: प्रातः 04:55 बजे से 05:43 बजे तक
- उपयोग: पूजा-पाठ, ध्यान-साधना, योग, अध्ययन के लिए सर्वश्रेष्ठ समय
- इस समय जागने और ईश्वर की उपासना करने से मन-बुद्धि तीव्र होती है
गोधूलि बेला (संध्या काल)
- समय: संध्या 05:37 बजे से 06:00 बजे तक
- गोपाष्टमी पर गाय की पूजा के लिए यह समय विशेष शुभ है
सर्वार्थ सिद्धि योग
आज सर्वार्थ सिद्धि योग नहीं बन रहा है क्योंकि गण्ड योग प्रभावी है।
अमृत सिद्धि योग
आज अमृत सिद्धि योग नहीं बन रहा है।
आज का चौघड़िया (Choghadiya Muhurat)
चौघड़िया दिन और रात को 8 भागों में बांटता है। प्रत्येक भाग लगभग 1.5 घंटे का होता है।
दिन का चौघड़िया (Din Ka Choghadiya)
सूर्योदय से सूर्यास्त तक:
- उद्वेग (06:31 – 08:00): अशुभ – सरकारी कार्यों के लिए ठीक
- चल (08:00 – 09:30): शुभ – यात्रा के लिए उत्तम
- रोग (09:30 – 11:00): अशुभ – इस समय से बचें
- काल (11:00 – 12:30): अशुभ – धन संचय कार्यों के लिए
- लाभ (12:30 – 14:00): अति शुभ – व्यापार, शिक्षा के लिए उत्तम
- उद्वेग (14:00 – 15:30): अशुभ
- शुभ (15:30 – 17:07): अति शुभ – सभी मांगलिक कार्यों के लिए
- अमृत (17:07 – 18:37): सर्वोत्तम – सभी कार्यों के लिए उत्तम
सुझाव: दिन में 12:30 से 14:00 बजे (लाभ चौघड़िया) और 15:30 से 17:07 बजे (शुभ चौघड़िया) के समय को प्राथमिकता दें।
रात्रि का चौघड़िया (Raat Ka Choghadiya)
सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक:
- शुभ (17:37 – 19:10): अति शुभ
- अमृत (19:10 – 20:45): सर्वोत्तम
- चल (20:45 – 22:20): शुभ – यात्रा के लिए
- रोग (22:20 – 23:55): अशुभ
- काल (23:55 – 01:30): अशुभ
- लाभ (01:30 – 03:05): शुभ
- उद्वेग (03:05 – 04:40): अशुभ
- शुभ (04:40 – 06:15): शुभ
आज का विशेष त्योहार: गोपाष्टमी 2025
गोपाष्टमी का महत्व
गोपाष्टमी हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र पर्व है जो कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन गाय माता और भगवान श्री कृष्ण की विशेष पूजा की जाती है।
पौराणिक कथा:
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन नंद बाबा ने बालक कृष्ण को गायों की देखभाल और चराने की जिम्मेदारी सौंपी थी। भगवान श्री कृष्ण अपने बड़े भाई बलराम के साथ पहली बार वृंदावन के वनों में गायों को चराने गए थे। इस दिन से ही भगवान कृष्ण को “गोपाल” और “गोविंद” जैसे नामों से जाना जाने लगा।
एक अन्य मान्यता के अनुसार, जब इंद्र देव ने अपने अहंकार में ब्रज पर घोर वर्षा की, तब भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर सात दिनों तक ब्रजवासियों और गायों की रक्षा की। आठवें दिन इंद्र देव को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने श्री कृष्ण से क्षमा मांगी। यह आठवां दिन कार्तिक शुक्ल अष्टमी थी, जिसे गोपाष्टमी के रूप में मनाया जाता है।
गोपाष्टमी पूजा विधि
सुबह की तैयारी:
- सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें
- स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- भगवान श्री कृष्ण की पूजा करें
गाय माता की पूजा:
- गाय और बछड़ों को स्वच्छ जल से स्नान कराएं
- उनके मस्तक पर रोली और चंदन का तिलक लगाएं
- गायों को फूलों की माला पहनाएं
- सींगों को सोने या पीले रंग से सजाएं (परंपरा के अनुसार)
- गले में घंटी बांधें
- पीठ पर सुंदर वस्त्र डालें
भोग और प्रसाद:
- गुड़, गेहूं, चना, हरा चारा अर्पित करें
- मौसमी फल और शुद्ध जल दें
- दीपक जलाएं और धूप-अगरबत्ती अर्पित करें
विशेष कार्य:
- गोशाला में जाकर गायों को भोजन कराएं
- गाय के खुरों की धूल को माथे पर लगाएं (अत्यंत शुभ माना जाता है)
- संध्या काल में गाय की परिक्रमा करें
- भगवान कृष्ण के भजन-कीर्तन करें
- गाय की सेवा के लिए दान-दक्षिणा दें
गोपाष्टमी के लाभ
- आध्यात्मिक लाभ: भगवान श्री कृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है
- भौतिक लाभ: घर में धन-समृद्धि और लक्ष्मी का वास होता है
- स्वास्थ्य लाभ: शरीर निरोगी रहता है और रोग दूर होते हैं
- पारिवारिक सुख: घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है
- ग्रह दोष निवारण: शुक्र और चंद्र दोष का निवारण होता है
- जीवन में सफलता: सभी कार्यों में सफलता मिलती है
कहां मनाई जाती है गोपाष्टमी?
गोपाष्टमी का सबसे भव्य आयोजन मथुरा, वृंदावन, बरसाना, गोकुल और ब्रज के अन्य क्षेत्रों में होता है। यहां गायों की विशाल शोभायात्रा निकाली जाती है और भव्य पूजा-अर्चना का आयोजन होता है।
विभिन्न नगरों के लिए पंचांग समय
विभिन्न स्थानों पर सूर्योदय-सूर्यास्त के समय में अंतर होने से पंचांग में भी थोड़ा बदलाव आता है:
प्रमुख शहरों के लिए समय:
मुंबई:
- सूर्योदय: 06:40 बजे
- सूर्यास्त: 06:10 बजे
- राहुकाल: 01:40 से 03:06 बजे
लखनऊ:
- सूर्योदय: 06:10 बजे
- सूर्यास्त: 05:20 बजे
- राहुकाल: 01:28 से 02:52 बजे
कोलकाता:
- सूर्योदय: 05:35 बजे
- सूर्यास्त: 04:55 बजे
- राहुकाल: 01:25 से 02:48 बजे
चेन्नई:
- सूर्योदय: 05:55 बजे
- सूर्यास्त: 05:50 बजे
- राहुकाल: 01:35 से 03:00 बजे
भोपाल:
- सूर्योदय: 06:25 बजे
- सूर्यास्त: 05:45 बजे
- राहुकाल: 01:32 से 02:58 बजे
आज के लिए विशेष सुझाव
आज क्या करें:
- गोपाष्टमी के अवसर पर गाय की सेवा अवश्य करें
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर भगवान की पूजा करें
- गायों को हरा चारा, गुड़ और अनाज खिलाएं
- दोपहर 12:30 से 14:00 बजे के बीच महत्वपूर्ण कार्य करें
- भगवान विष्णु और श्री कृष्ण की पूजा-अर्चना करें
- संध्या काल में गाय माता की आरती करें
- गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराएं
- तुलसी के पौधे की पूजा करें (कार्तिक मास में विशेष महत्व)
आज क्या न करें:
- राहुकाल (01:34 से 03:00 बजे) में कोई नया कार्य शुरू न करें
- प्रातः 10:15 से 11:00 बजे तक दुर्मुहूर्त है – बचें
- गण्ड योग के कारण अत्यधिक सावधानी बरतें
- यमघंट और गुलिक काल में शुभ कार्य न करें
- दूसरों का अपमान या बुरा व्यवहार न करें
- मांस-मदिरा का सेवन न करें (गोपाष्टमी पर विशेष निषेध)
- झूठ बोलने और कलह करने से बचें
व्यापार और कार्य के लिए सुझाव
नया व्यापार शुरू करने के लिए:
- सर्वोत्तम समय: दोपहर 11:49 से 12:35 बजे (अभिजीत मुहूर्त)
- वैकल्पिक समय: दोपहर 12:30 से 14:00 बजे (लाभ चौघड़िया)
- गुरुवार का दिन व्यापार शुरू करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है
संपत्ति और वाहन खरीदी:
- आज का दिन संपत्ति, वाहन, आभूषण खरीदने के लिए उत्तम है
- अभिजीत मुहूर्त में खरीदारी करें
- राहुकाल से बचें
यात्रा के लिए:
- प्रातः 08:00 से 09:30 बजे (चल चौघड़िया)
- संध्या 05:30 से 06:30 बजे
- राहुकाल और यमघंट से बचकर यात्रा करें
स्वास्थ्य और आयुर्वेद सुझाव
आज के दिन:
- सुबह दूध में थोड़ा हल्दी मिलाकर पिएं
- गाय के दूध, घी और दही का सेवन विशेष लाभकारी है
- पीपल के पेड़ की परिक्रमा करें
- योग और प्राणायाम करें
- तुलसी के पत्ते का सेवन करें (कार्तिक मास में विशेष फलदायी)
राशि अनुसार दिन का फल
मेष राशि: व्यापार में लाभ, नई योजनाएं बनेंगी
वृष राशि: धन आगमन के योग, परिवार में खुशी
मिथुन राशि: यात्रा के योग, नए अवसर मिलेंगे
कर्क राशि: भावनात्मक संतुलन जरूरी, सावधानी बरतें
सिंह राशि: सफलता का दिन, आत्मविश्वास बढ़ेगा
कन्या राशि: स्वास्थ्य पर ध्यान दें, शुभ समाचार मिलेंगे
तुला राशि: सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी, मित्रों से मुलाकात
वृश्चिक राशि: गुप्त लाभ के योग, सावधानी से काम करें
धनु राशि: गुरु के आशीर्वाद से विशेष लाभ
मकर राशि: चंद्रमा आपकी राशि में, भावनाओं में उतार-चढ़ाव
कुंभ राशि: आय के नए स्रोत, खर्च नियंत्रित रखें
मीन राशि: आध्यात्मिक उन्नति, मन शांत रहेगा
पंचांग के पांच अंग (विस्तृत जानकारी)
1. तिथि (Tithi)
तिथि चंद्रमा की स्थिति पर आधारित होती है। आज अष्टमी और नवमी तिथि है। अष्टमी माता दुर्गा को समर्पित है और नवमी भी देवी शक्ति की पूजा का दिन है।
2. वार (Vara/Weekday)
आज गुरुवार है जो बृहस्पति देव का दिन है। यह सप्ताह का सबसे शुभ दिन माना जाता है। गुरुवार को पीले वस्त्र धारण करें और चने की दाल का दान करें।
3. नक्षत्र (Nakshatra)
आज श्रवण नक्षत्र है जो भगवान विष्णु का नक्षत्र है। यह ज्ञान, शिक्षा और श्रवण (सुनने) से संबंधित है। इस नक्षत्र में शुरू किया गया कोई भी शैक्षणिक कार्य सफल होता है।
4. योग (Yoga)
योग सूर्य और चंद्र की युति से बनता है। आज शूल और गण्ड योग है जो अशुभ माने जाते हैं। इसलिए अत्यंत आवश्यक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त का चयन करें।
5. करण (Karana)
करण तिथि का आधा भाग होता है। आज बव, बालव और कौलव करण हैं जो चर करण की श्रेणी में आते हैं और शुभ माने जाते हैं।
मंत्र और स्तोत्र
गोपाष्टमी के दिन विशेष मंत्र:
गाय माता की पूजा मंत्र:
ॐ नमो भगवते गोपालाय गोभिः सहितं सुख प्रदाय स्वाहा।भगवान श्री कृष्ण मंत्र:
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।गुरुवार का विशेष मंत्र:
ॐ बृं बृहस्पतये नमः।गौ माता स्तुति:
सर्वे देवा: सहस्राणि गोषु तिष्ठन्ति नित्यदा।
गाव: श्रेयोददुस्तस्माद् गावो रक्ष्या प्रयत्नत:।।आज के दिन 108 बार जपें:
- हरे कृष्ण महामंत्र: हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे।
- गायत्री मंत्र: ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।
आज का पंचांग पढ़ने का महत्व
पंचांग हिंदू संस्कृति और ज्योतिष शास्त्र का अभिन्न अंग है। यह केवल एक कैलेंडर नहीं है, बल्कि हमारे दैनिक जीवन को ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं के साथ संतुलित करने का माध्यम है।
पंचांग के लाभ:
- शुभ मुहूर्त का ज्ञान: किसी भी कार्य को शुरू करने का सही समय जान सकते हैं
- अशुभ समय से बचाव: राहुकाल, यमघंट आदि से बचकर असफलता से दूर रह सकते हैं
- त्योहारों की जानकारी: सभी व्रत-त्योहारों की तिथि और समय की सटीक जानकारी
- ग्रह स्थिति: ग्रहों की स्थिति से जीवन में आने वाले परिवर्तनों का अंदाजा
- आध्यात्मिक विकास: नियमित पंचांग पढ़ने से धार्मिक जागरूकता बढ़ती है
डिजिटल युग में पंचांग
आज के आधुनिक युग में इंटरनेट और मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से पंचांग देखना बेहद आसान हो गया है। अब आप:
- ऑनलाइन पंचांग देख सकते हैं
- मोबाइल ऐप से दैनिक पंचांग प्राप्त कर सकते हैं
- अपनी लोकेशन के अनुसार पंचांग देख सकते हैं
- व्यक्तिगत कुंडली से मिलान कर सकते हैं
- अलर्ट और नोटिफिकेशन प्राप्त कर सकते हैं
निष्कर्ष
30 अक्टूबर 2025 का दिन गोपाष्टमी के पावन पर्व के कारण विशेष महत्व रखता है। गुरुवार का दिन होने से यह और भी शुभ है। हालांकि गण्ड योग के कारण पूरे दिन सावधानी आवश्यक है, फिर भी अभिजीत मुहूर्त और लाभ चौघड़िया जैसे शुभ समय का लाभ उठाकर आप अपने महत्वपूर्ण कार्य पूर्ण कर सकते हैं।
गाय माता की सेवा और भगवान श्री कृष्ण की पूजा आज के दिन विशेष फलदायी है। राहुकाल (दोपहर 01:34 से 03:00 बजे) और दुर्मुहूर्त से बचते हुए अपने दिन की योजना बनाएं।
आज का सार:
- गोपाष्टमी पर गाय की सेवा करें
- अभिजीत मुहूर्त का लाभ उठाएं
- राहुकाल से बचें
- भगवान कृष्ण की पूजा करें
- दान-पुण्य करें
सामान्य प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: आज का पंचांग क्या है?
उत्तर: आज 30 अक्टूबर 2025, गुरुवार है। कार्तिक शुक्ल पक्ष अष्टमी/नवमी तिथि, श्रवण नक्षत्र और गोपाष्टमी का पावन दिन है।
प्रश्न 2: आज का राहुकाल कितने बजे है?
उत्तर: आज (गुरुवार) राहुकाल दोपहर 01:34 बजे से 03:00 बजे तक है।
प्रश्न 3: गोपाष्टमी क्यों मनाई जाती है?
उत्तर: इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने पहली बार गायों को चराने का कार्य किया था। यह गाय माता और भगवान कृष्ण की पूजा का पर्व है।
प्रश्न 4: आज का शुभ मुहूर्त क्या है?
उत्तर: अभिजीत मुहूर्त (11:49 से 12:35 बजे) और लाभ चौघड़िया (12:30 से 14:00 बजे) सर्वोत्तम हैं।
प्रश्न 5: आज कौन सी तिथि है?
उत्तर: आज कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि (सुबह 10:07 बजे तक) और उसके बाद नवमी तिथि है।
प्रश्न 6: क्या आज कोई शुभ कार्य कर सकते हैं?
उत्तर: हां, अभिजीत मुहूर्त और शुभ चौघड़िया में सभी शुभ कार्य किए जा सकते हैं। केवल राहुकाल और दुर्मुहूर्त से बचें।
प्रश्न 7: गुरुवार को कौन सा ग्रह शुभ होता है?
उत्तर: गुरुवार बृहस्पति (Jupiter) देव का दिन है जो सबसे शुभ ग्रह माना जाता है।
प्रश्न 8: आज कौन सा नक्षत्र है?
उत्तर: आज श्रवण नक्षत्र है जो संध्या 06:34 बजे तक प्रभावी रहेगा।
महत्वपूर्ण नोट
यह पंचांग दिल्ली के समय क्षेत्र (IST) के अनुसार तैयार किया गया है। विभिन्न शहरों में सूर्योदय-सूर्यास्त के समय में 15-30 मिनट का अंतर हो सकता है, जिससे राहुकाल और चौघड़िया के समय में भी थोड़ा परिवर्तन हो सकता है। अपने स्थानीय पंचांग या ज्योतिषी से परामर्श अवश्य करें।
अस्वीकरण: यह पंचांग केवल सामान्य जानकारी के लिए है। व्यक्तिगत कुंडली और विशेष मुहूर्तों के लिए किसी योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श लें।
धन्यवाद
आज का पंचांग पढ़ने के लिए धन्यवाद। इस जानकारी को अपने परिवार और मित्रों के साथ साझा करें जिससे वे भी इस पावन दिन का लाभ उठा सकें।
जय श्री कृष्ण! जय गौ माता!
प्रमुख कीवर्ड्स (Keywords):
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अंतिम अपडेट: 30 अक्टूबर 2025, सुबह (Morning Update)
लेखक नोट: यह पंचांग विभिन्न प्रामाणिक स्रोतों और पारंपरिक ज्योतिष ग्रंथों के आधार पर तैयार किया गया है। पंचांग की गणना लाहिरी अयनांश पद्धति का उपयोग करके की गई है।
