प्रस्तावना
आज की तिथि 20 नवंबर 2025 को जानना हर हिंदू के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि तिथि के आधार पर ही शुभ कार्यों का मुहूर्त, व्रत, त्यौहार और धार्मिक अनुष्ठानों का निर्धारण होता है। हिंदू पंचांग में तिथि का विशेष स्थान है और यह चंद्रमा की स्थिति पर आधारित होती है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि आज कौन सी तिथि है, इसका क्या महत्व है और इस तिथि में कौन से कार्य शुभ माने जाते हैं।
आज की तिथि – 20 नवंबर 2025
आज की तिथि: कार्तिक कृष्ण पक्ष द्वितीया
पक्ष: कृष्ण पक्ष (वद पक्ष)
मास: कार्तिक मास
संवत्सर: विक्रम संवत 2082
शक संवत: 1947
वार: गुरुवार (बृहस्पतिवार)
तिथि प्रारंभ: 19 नवंबर 2025, रात्रि 11:23 बजे से
तिथि समाप्त: 20 नवंबर 2025, रात्रि 10:48 बजे तक
तिथि की कुल अवधि: लगभग 23 घंटे 25 मिनट
तिथि क्या है? (What is Tithi?)
तिथि हिंदू पंचांग का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। यह चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर पर आधारित होती है। जब चंद्रमा सूर्य से 12 डिग्री आगे बढ़ता है तो एक तिथि पूर्ण होती है। एक चंद्र मास में कुल 30 तिथियां होती हैं जो दो पक्षों में विभाजित होती हैं:
शुक्ल पक्ष (Shukla Paksha)
- अमावस्या के बाद से पूर्णिमा तक
- चंद्रमा का बढ़ता हुआ चरण
- 15 तिथियां: प्रतिपदा से पूर्णिमा तक
कृष्ण पक्ष (Krishna Paksha)
- पूर्णिमा के बाद से अमावस्या तक
- चंद्रमा का घटता हुआ चरण
- 15 तिथियां: प्रतिपदा से अमावस्या तक
द्वितीया तिथि का संपूर्ण विवरण
आज द्वितीया तिथि है जो पंचांग की दूसरी तिथि होती है। द्वितीया तिथि को ‘दूज’ या ‘बीज’ के नाम से भी जाना जाता है।
द्वितीया तिथि की विशेषताएं
तिथि स्वामी: ब्रह्मा देव
देवता: भगवान गणेश और देवी पार्वती
ग्रह: चंद्रमा
गुण: मिश्रित (शुभ और अशुभ दोनों)
प्रकृति: चर (गतिशील)
तत्व: जल तत्व
द्वितीया तिथि में पूजनीय देवता
- भगवान गणेश: द्वितीया तिथि विशेष रूप से गणेश जी की पूजा के लिए शुभ मानी जाती है
- देवी पार्वती: माता पार्वती की आराधना का विशेष दिन
- चंद्र देव: चंद्रमा की पूजा से मानसिक शांति मिलती है
- ब्रह्मा देव: तिथि स्वामी के रूप में ब्रह्मा जी की पूजा
शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की द्वितीया में अंतर
शुक्ल पक्ष द्वितीया:
- बहुत अधिक शुभ मानी जाती है
- नए कार्यों की शुरुआत के लिए उत्तम
- विवाह और मांगलिक कार्यों के लिए उपयुक्त
- धन लाभ के योग
कृष्ण पक्ष द्वितीया (आज की तिथि):
- मध्यम फलदायी तिथि
- धार्मिक कार्यों के लिए उपयुक्त
- पूर्व में शुरू किए गए कार्यों को पूरा करने के लिए अच्छी
- पितर पूजन और तर्पण के लिए उचित समय
कार्तिक मास का महत्व
आज का दिन कार्तिक मास में आता है जो हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है।
कार्तिक मास की विशेषताएं
- देवों का मास: इसे दामोदर मास भी कहा जाता है
- तीर्थ यात्रा: इस मास में तीर्थ यात्रा का विशेष महत्व
- दान-पुण्य: दान करने से अनंत गुना फल मिलता है
- तुलसी पूजन: प्रतिदिन तुलसी की पूजा अवश्य करें
- दीपदान: शाम को दीप जलाने का विशेष महत्व
कार्तिक मास में करने योग्य कार्य
- प्रातःकाल स्नान करना
- भगवान विष्णु की पूजा
- तुलसी परिक्रमा और पूजन
- गंगा स्नान या पवित्र नदियों में स्नान
- ब्राह्मण भोजन और गौ दान
- दीपदान और अन्नदान
- व्रत और उपवास
- धार्मिक ग्रंथों का पाठ
द्वितीया तिथि में करने योग्य कार्य
धार्मिक कार्य
- गणेश पूजा: सुबह या शाम गणेश जी की विधिवत पूजा करें
- तुलसी पूजन: कार्तिक मास होने से तुलसी पूजा अवश्य करें
- मंत्र जाप: गणेश मंत्र, विष्णु सहस्रनाम का पाठ
- दीप दान: शाम को पीपल या तुलसी के पास दीप जलाएं
- तर्पण: कृष्ण पक्ष में पितरों का तर्पण करें
सामाजिक और व्यावहारिक कार्य
- शिक्षा संबंधी: नया पाठ्यक्रम शुरू करना, अध्ययन
- व्यापार: सामान्य व्यापारिक गतिविधियां
- यात्रा: छोटी यात्राएं कर सकते हैं
- कला: संगीत, नृत्य, कला सीखना शुरू कर सकते हैं
- दान: गरीबों को भोजन, वस्त्र दान करें
विशेष उपाय और पूजा विधि
गणेश पूजा विधि द्वितीया तिथि पर:
- प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें
- गणेश जी की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें
- लाल फूल, दूर्वा (घास), मोदक अर्पित करें
- गणेश मंत्र का जाप करें: “ॐ गं गणपतये नमः”
- 21 बार या 108 बार मंत्र का जाप करें
- आरती करें और प्रसाद वितरण करें
द्वितीया तिथि में वर्जित कार्य
कृष्ण पक्ष द्वितीया में वर्जित कार्य
- विवाह संस्कार: कृष्ण पक्ष में विवाह नहीं करना चाहिए
- गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश टालें
- नई दुकान: नया व्यापार शुरू न करें
- बड़ा निवेश: बड़े वित्तीय निर्णय टालें
- संपत्ति खरीद: जमीन-जायदाद खरीदने से बचें
- वाहन क्रय: नया वाहन खरीदने से बचें
सामान्य परहेज
- झूठ बोलने से बचें
- क्रोध और कठोर वचन न बोलें
- मांस-मदिरा का सेवन न करें
- किसी को कष्ट न दें
- जानवरों के प्रति हिंसा न करें
द्वितीया तिथि से जुड़े प्रमुख त्यौहार
द्वितीया तिथि पर मनाए जाने वाले कुछ महत्वपूर्ण त्यौहार:
1. चंद्र दर्शन द्वितीया
शुक्ल पक्ष की द्वितीया को चंद्रमा के पहली बार दर्शन का दिन।
2. भाई दूज / यम द्वितीया
कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाई जाती है। भाई-बहन का पवित्र त्यौहार।
3. गणेश चतुर्थी के बाद की द्वितीया
गणेश चतुर्थी से दो दिन बाद की द्वितीया विशेष मानी जाती है।
4. बहुला द्वितीया
भाद्रपद कृष्ण द्वितीया को बहुला द्वितीया कहते हैं।
द्वितीया तिथि का ज्योतिषीय महत्व
तिथि का प्रभाव
द्वितीया तिथि चंद्रमा से प्रभावित होती है, इसलिए:
- मानसिक स्थिति: मन में उत्साह और सकारात्मकता
- भावनात्मक संतुलन: भावनाओं में स्थिरता
- रचनात्मकता: कला और साहित्य में रुचि
- सामाजिक संबंध: मित्रता और सामाजिक संबंध मजबूत होते हैं
राशि अनुसार द्वितीया तिथि का प्रभाव
मेष राशि: आत्मविश्वास में वृद्धि, नए कार्यों की शुरुआत
वृषभ राशि: धन लाभ के योग, स्थिरता की प्राप्ति
मिथुन राशि: संवाद कौशल में सुधार, नई जानकारी
कर्क राशि: पारिवारिक सुख, घरेलू कार्यों में सफलता
सिंह राशि: सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि
कन्या राशि: विश्लेषण क्षमता में वृद्धि, सेवा कार्य
तुला राशि: संतुलित निर्णय, साझेदारी में लाभ
वृश्चिक राशि: गहन चिंतन, रहस्यों का उद्घाटन
धनु राशि: भाग्योदय, दूरदर्शिता में वृद्धि
मकर राशि: कार्य में सफलता, लक्ष्य प्राप्ति
कुंभ राशि: नवाचार, सामाजिक कार्यों में रुचि
मीन राशि: आध्यात्मिकता में वृद्धि, सहानुभूति
द्वितीया तिथि के अनुसार आज का मुहूर्त
शुभ मुहूर्त
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:07 से 12:55 बजे तक
- अमृत चौघड़िया: दोपहर 11:31 से 01:07 बजे तक
- लाभ चौघड़िया: प्रातः 09:55 से 11:31 बजे तक
- शुभ चौघड़िया: दोपहर 02:43 से 04:19 बजे तक
अशुभ मुहूर्त
- राहु काल: दोपहर 01:30 से 03:00 बजे तक
- यमगण्ड काल: प्रातः 09:00 से 10:30 बजे तक
- गुलिक काल: प्रातः 10:30 से 12:00 बजे तक
द्वितीया तिथि में विशेष दान और पुण्य कार्य
दान की सामग्री
- गणेश जी को: लड्डू, मोदक, दूर्वा, लाल फूल
- ब्राह्मणों को: चावल, दाल, घी, गुड़, वस्त्र
- गरीबों को: भोजन, अनाज, फल
- गाय को: चारा, गुड़, रोटी
- चंद्र देव को: चावल, श्वेत वस्त्र, मोती
पुण्य कार्य
- तुलसी के पौधे की सेवा
- पीपल वृक्ष को जल चढ़ाना
- भूखे को भोजन कराना
- प्यासे को जल पिलाना
- मंदिर में दीप जलाना
- पक्षियों को दाना डालना
- गरीब बच्चों की शिक्षा में मदद
द्वितीया तिथि के लिए विशेष मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः
ॐ वक्रतुण्डाय हुम्
ॐ गजाननाय नमःचंद्र मंत्र
ॐ सोम सोमाय नमः
ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमःब्रह्मा मंत्र
ॐ ब्रह्मणे नमः
ॐ वेदात्मने नमःविष्णु मंत्र (कार्तिक मास के लिए)
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
ॐ नमो नारायणायकृष्ण पक्ष की द्वितीया में विशेष ध्यान देने योग्य बातें
पितर पूजन
कृष्ण पक्ष में पितरों की पूजा और तर्पण का विशेष महत्व है:
- तर्पण विधि: काले तिल, जल और दूध से तर्पण करें
- श्राद्ध: यदि पितरों की तिथि हो तो श्राद्ध करें
- ब्राह्मण भोजन: ब्राह्मणों को भोजन कराएं
- दान: काले वस्त्र, काले तिल, लोहे का दान करें
मानसिक शुद्धि
- क्षमा भाव रखें
- किसी से द्वेष न रखें
- सत्य और अहिंसा का पालन करें
- आत्म-चिंतन करें
- ध्यान और योग करें
द्वितीया तिथि का आयुर्वेदिक महत्व
स्वास्थ्य सुझाव
द्वितीया तिथि में चंद्रमा का प्रभाव होने से:
- आहार: हल्का और सुपाच्य भोजन करें
- जल: प्रचुर मात्रा में जल पिएं
- व्यायाम: हल्का योगाभ्यास करें
- नींद: पर्याप्त नींद लें (7-8 घंटे)
- मानसिक शांति: ध्यान और प्राणायाम करें
परहेज
- भारी और तैलीय भोजन से बचें
- अधिक मसालेदार खाना न खाएं
- देर रात तक न जागें
- तनाव से दूर रहें
- अधिक चिंता न करें
द्वितीया तिथि में जन्मे व्यक्तियों की विशेषताएं
व्यक्तित्व के गुण
- मानसिक क्षमता: तीव्र बुद्धि और स्मरण शक्ति
- सृजनात्मकता: कला और साहित्य में रुचि
- भावुकता: संवेदनशील और दयालु स्वभाव
- सामाजिक: मित्रवत और सामाजिक व्यवहार
- धार्मिक: धर्म और अध्यात्म में रुचि
करियर विकल्प
- शिक्षा और अध्यापन
- कला और संगीत
- साहित्य और लेखन
- ज्योतिष और धर्म
- सामाजिक कार्य और परामर्श
द्वितीया तिथि के अनुसार व्रत और उपवास
व्रत विधि
- प्रातःकाल: सूर्योदय से पहले स्नान करें
- संकल्प: व्रत का संकल्प लें
- पूजा: गणेश जी की पूजा करें
- आहार: फलाहार या एक समय भोजन
- व्रत खोलना: संध्या के समय पूजा के बाद
व्रत में खाने योग्य
- फल और दूध
- साबूदाना और मखाना
- कुट्टू का आटा
- सिंघाड़े का आटा
- मेवे और सूखे मेवे
द्वितीया तिथि का वैज्ञानिक पक्ष
चंद्रमा का प्रभाव
चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीबी उपग्रह है और इसका प्रभाव:
- समुद्री ज्वार: चंद्रमा के कारण ज्वार-भाटा
- मानव शरीर: शरीर में 70% जल पर चंद्रमा का प्रभाव
- मन और भावनाएं: मानसिक स्थिति पर प्रभाव
- प्रकृति: पेड़-पौधों और जीवों पर प्रभाव
द्वितीया तिथि की विशेष स्थिति
द्वितीया में चंद्रमा सूर्य से 24 डिग्री आगे होता है जो:
- नए कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल ऊर्जा
- मानसिक स्पष्टता और निर्णय क्षमता
- शारीरिक ऊर्जा में संतुलन
- भावनात्मक स्थिरता
द्वितीया तिथि के प्रसिद्ध ऐतिहासिक घटनाएं
इतिहास में द्वितीया तिथि पर कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुई हैं:
- यम द्वितीया: यमराज ने अपनी बहन यमुना से भेंट की
- गणेश पूजन: विभिन्न महत्वपूर्ण गणेश उत्सव
- धार्मिक अनुष्ठान: प्राचीन काल से द्वितीया पर विशेष पूजा
- राजतिलक: कई राजाओं का राज्याभिषेक द्वितीया पर
आज की तिथि के अनुसार व्यावहारिक सुझाव
सुबह के कार्य (06:00 – 10:00 बजे)
- प्रातः 06:00 बजे उठें
- स्नान और पूजा करें
- तुलसी जी को जल अर्पित करें
- गणेश जी की पूजा करें
- परिवार के साथ नाश्ता करें
- दैनिक कार्यों की योजना बनाएं
दोपहर के कार्य (10:00 – 03:00 बजे)
- कार्यालय या व्यापार के कार्य करें
- अभिजित मुहूर्त का लाभ उठाएं
- राहु काल में सावधानी बरतें
- मध्याह्न भोजन समय पर करें
- थोड़ा विश्राम करें
शाम के कार्य (03:00 – 07:00 बजे)
- संध्या वंदन करें
- तुलसी और पीपल को दीप जलाएं
- गाय को चारा खिलाएं
- परिवार के साथ समय बिताएं
- हल्का भोजन करें
रात्रि के कार्य (07:00 – 10:00 बजे)
- परिवार के साथ भोजन करें
- धार्मिक पुस्तकें पढ़ें
- ध्यान या भजन करें
- अगले दिन की योजना बनाएं
- समय पर सोने की तैयारी करें
द्वितीया तिथि के बारे में रोचक तथ्य
- अद्वितीय तिथि: द्वितीया का अर्थ है “दूसरी” या “अद्वितीय”
- गणेश प्रिय: भगवान गणेश को द्वितीया तिथि सबसे प्रिय है
- पूर्णिमा के बाद दूसरी: पूर्णिमा के बाद की दूसरी तिथि विशेष मानी जाती है
- चंद्र प्रभाव: चंद्रमा की किरणों का सर्वाधिक स्पष्ट प्रभाव
- कला दिवस: कला और संस्कृति के लिए शुभ तिथि
द्वितीया तिथि में विशेष साधना
गणेश साधना
द्वितीया तिथि गणेश साधना के लिए सर्वोत्तम है:
- मंत्र जाप: 108 बार गणेश मंत्र का जाप
- रुद्राक्ष: 5 मुखी रुद्राक्ष धारण करें
- पूजा सामग्री: लाल फूल, मोदक, दूर्वा
- समय: प्रातःकाल या संध्याकाल
- फल: बुद्धि, सिद्धि और समृद्धि की प्राप्ति
चंद्र साधना
मानसिक शांति के लिए चंद्र साधना:
- मंत्र: ॐ सोम सोमाय नमः
- माला: मोती या स्फटिक माला
- समय: रात्रि में चंद्रोदय के बाद
- फल: मानसिक शांति और भावनात्मक स्थिरता
आज की तिथि – अंतिम सुझाव और निष्कर्ष
20 नवंबर 2025 को कार्तिक कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है जो धार्मिक और व्यावहारिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यद्यपि यह कृष्ण पक्ष की तिथि है, फिर भी द्वितीया होने के कारण इसका विशेष महत्व है।
आज के लिए मुख्य सुझाव:
- प्रातःकाल: गणेश जी की पूजा अवश्य करें
- दिन में: शुभ मुहूर्त का लाभ उठाएं
- राहु काल: 01:30 से 03:00 बजे तक सावधान रहें
- शाम को: दीपदान और तुलसी पूजन करें
- रात्रि में: पितरों का स्मरण और तर्पण करें
विशेष बातें:
- कार्तिक मास होने से प्रतिदिन तुलसी पूजा अवश्य करें
- कृष्ण पक्ष में पितरों के लिए दान-पुण्य करें
- गुरुवार होने से बृहस्पति देव की पूजा का लाभ मिलेगा
- मानसिक शांति के लिए ध्यान और प्राणायाम करें
- सकारात्मक विचार रखें और दूसरों की मदद करें
निष्कर्ष
आज की तिथि अर्थात् द्वितीया तिथि हिंदू पंचांग में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यह तिथि गणेश जी को समर्पित है और बुद्धि, ज्ञान और सिद्धि प्रदान करने वाली है। कृष्ण पक्ष की द्वितीया होने के कारण इसमें पितर पूजन और तर्पण का भी विशेष महत्व है।
आज के दिन को सार्थक बनाने के लिए धार्मिक कार्यों के साथ-साथ सामाजिक और व्यावहारिक जिम्मेदारियों को भी निभाएं। शुभ मुहूर्त में महत्वपूर्ण कार्य करें और अशुभ समय में सावधानी बरतें।
भगवान गणेश की कृपा से आज का दिन आपके लिए मंगलमय और शुभ हो। सभी कार्यों में सफलता मिले और जीवन में सुख-समृद्धि आए।
जय गणेश! जय श्री विष्णु!
